तबाही का मंजर देख गाजियाबाद स्थित महागुनपुरम निवासी मदनलाल और उनके भाई ओमदत्त की रूह कांप उठी। आंखों में खौफ का मंजर समेटे मदनलाल ने बताया कि काठमांडू में अचानक भूकंप से सड़कें चटकने लगीं, इमारतें ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगीं।
पेड़ और बिजली के खंभे गिरने लगे। ऐसा लगा जैसे मौत सामने नाच रही हो। भूकंप के बाद पहाड़ियों के बीच में ही फंसे मदनलाल किसी तरह एयरपोर्ट पहुंचे तो फ्लाइट कैंसल हो चुकी थी।
जिसके बाद भारतीय वायुसेना के विमान से रविवार रात दिल्ली से घर पहुंचे। वह भाई के साथ पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन के लिए गए थे।
टैक्स कंसलटेंट मदनलाल ने बताया कि गत 23 अप्रैल को दोनों भाई वाराणसी गए थे। वहां से नेपाल रवाना हो गए और 25 अप्रैल की सुबह नेपाल पहुंचे।
पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन करने के बाद पार्वती मंदिर के दर्शन को निकल पड़े। पहाड़ी चढ़ने के दौरान ही भूकंप के झटके लगे। कुछ पहाड़ियों में दरारें दिखने लगी और सड़कें चटकने लगीं। पहाड़ से पत्थर नीचे आने लगे।
आसपास बनी इमारतें गिरने लगीं। चारों ओर भगदड़ मच गई। लेकिन सब्र से काम लेते हुए भाई और वह एक एक सुरक्षित स्थान पर बैठ गए। करीब दो घंटे बाद महौल शांत हुआ तो पैदल होटल पहुंचे और परिवार को सकुशल होने की सूचना दी।
उन्होंने बताया कि जिस होटल में रुके थे, उसमें भी दरारें आ गईं। इस पर दूसरे होटल पहुंचे लेकिन रात जागते हुए ही गुजारी । 26 को एयरपोर्ट पहुंचे तो पता चला कि एयर इंडिया की फ्लाइट कैंसल है।
टैक्सी चालक भारतीय सीमा में पहुंचाने के लिए 30 हजार रुपये मांग रहे थे। पैसे देने को तैयार हो गए लेकिन फिर टैक्सी चालक ने मना कर दिया।
उन्होंने बताया कि इसके बाद वह एयरपोर्ट पहुंचे, जहां भारतीय वायुसेना और आर्मी के अफसरों से बात की। इसके बाद 350 भारतीय नागरिकों के साथ रविवार रात 11 बजे पालम एयरपोर्ट पहुंच सके।