गाजियाबाद से सटे ट्रोनिका सिटी के अपेरल पार्क में रविवार शाम एक निर्माणाधीन फैक्ट्री का लेंटर भरभराकर गिर पड़ा। शाम करीब 5:30 बजे हुए इस हादसे में 40 मजदूरों के दबने की आशंका जताई जा रही है। बचाव अभियान टीमों ने दबे लोगों में से 3 को बाहर निकाला, जिन्हें जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन वहां एक की मौत हो गई।
हादसे के वक्त फैक्ट्री में 80 मजदूर काम कर रहे थे। मामूली रूप से घायल हुए 40 लोग बाद में घटना स्थल से निकल गए। दिल्ली के गांधीनगर निवासी चुन्ने खां का अपेरल पार्क में प्लाट संख्या बी-5 है। करीब दस हजार वर्गमीटर के इस प्लाट पर दो हजार वर्ग मीटर पर 20 फीट ऊंचा लेंटर डाला जा रहा था।
लेंटर का कुछ हिस्सा शनिवार को भी डाला गया था। रविवार शाम करीब साढे़ 5 बजे लेंटर अचानक ही नीचे गिरने लगा। काम कर रहे कुछ मजदूरों को जब इसका अहसास हुआ तो उन्होंने कूदकर अपनी जान बचाई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद मौके पर मौजूद फैक्ट्री मालिक चुन्ने खां और ठेकेदार जफरूद्दीन मामूली रूप से घायल मजदूरों के साथ मौके से भाग निकला।
आधा घंटे तक मचती रही चीख पुकार
कटिहार निवासी मजदूर संजय शर्मा ने बताया कि वह छत पर लेंटर का काम कर रहा था। इसी दौरान एक ओर से तेज आवाज के साथ लेंटर नीचे गिरता चला गया। उसे कुछ समझ ही नहीं आया तो वह छत से नीचे कूद गया। उसे काफी चोट आई हैं।
संजय के अनुसार हादसे के समय इमारत में काफी मजदूर काम कर रहे थे। उसने बताया कि उसके दो भाई मोहन और प्रमोद के साथ अन्य कई मजदूर मलबे में दबे हैं।
हादसे की खबर मिलते ही आसपास के ग्रामीण और डेरा सच्चा सौदा से जुडे़ लोग मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। घटना के करीब चार घंटे बाद रात 9.30 बजे एनडीआरएफ 8वीं बटालियन की दो टीमें मौके पर पहुंचीं। टीम के साथ डॉग स्क्वायड भी था।
क्या-क्या बरती जा रही थी लापरवाही
फैक्ट्री निर्माण में घोर लापरवाही बरती जा रही थी। डबल स्टेट की बल्ली लगाकर 20 फीट ऊंची दीवार पर लेंटर डाला जा रहा था। इसके अलावा लेंटर और बीम एक साथ ही बनाए जा रहे थे।
लेंटर गिरते ही वहां चीख-पुकार मच गई। बदहवास मजदूरों की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या और अब वह क्या करें। हादसे के बाद तत्काल कोई मदद भी नहीं पहुंच सकी। पास ही स्थित अगरौला गांव के लोगों के पहुंचने पर राहत कार्य शुरू हुआ।
हादसे का पता चलते ही डेरा सच्चा सौदा से जुडे़ वालंटियर भी मौके पर पहुंच गए। इसके बाद स्थानीय स्तर पर ही तीन जेसीबी मशीनों से मलबा हटाया गया। देरी से पहुंची पुलिस को लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा। देरी से राहत कार्य शुरू होने के चलते लोगों ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की।
मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं कि लापरवाही किस स्तर पर हुई है। हादसे के कारण क्या रहे हैं। दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - धर्मेंद्र सिंह, एसएसपी गाजियाबाद