सेक्टर-74 स्थित केपटाउन हाउसिंग प्रोजेक्ट के ले-आउट में मनमर्जी से बदलाव कर विला की जगह फ्लैट बना दिए गए। ग्रीन एरिया को भी कम कर दिया। फ्लैट खरीदारों ने सोमवार को प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण और एसीईओ पीके अग्रवाल से इसकी शिकायत भी की है।
सोसायटी में रहने वाले फ्लैट खरीदार सोमवार सुबह प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण से मिले। उनसे एफएआर बढ़ाए जाने की शिकायत की। चेयरमैन ने एसीईओ पीके अग्रवाल के साथ बैठक करने को कहा। दोपहर बाद खरीदारों ने एसीईओ से मिलकर सोसायटी में होने वाली परेशानियों से अवगत कराया। बैठक में शामिल खरीदार शैलेंद्र कुमार ने बताया कि बिल्डर ने प्रोजेक्ट का निर्माण 2010 में शुरू किया था। उस समय जो ले-आउट प्राधिकरण में जमा किया था, उसकी तुलना में कई बदलाव कर लिए हैं। लेआउट बदलने से पहले खरीदारों से सहमति भी नहीं ली गई है।
शैलेंद्र ने बताया कि बिल्डर ने 2010 के ले-आउट में विला का प्रस्ताव किया था, 2012 में उसे फ्लैट में तब्दील कर दिया। 2012 के लेआउट में टावरों की ऊंचाई 20 मंजिल तक थी, जो कि 2014 में 25 मंजिल कर दिए। सोसायटी में चार क्लब प्रस्तावित थे, लेकिन पांच बना दिए। ये क्लब ग्रीन एरिया में कटौती कर बनाए गए हैं। खरीदारों का कहना है कि 2012 के लेआउट में 18376 वर्ग मीटर जमीन पर डिस्पेंसरी, टैक्सी स्टैंड, पुलिस बूथ, डेयरी बूथ आदि प्रस्तावित थे, 2014 में यह जगह घटकर 4080 वर्ग मीटर ही रह गई है। खरीदारों का कहना है कि 2010 के लेआउट में परिसर के अंदर 2027 पेड़ प्रस्तावित थे, जो कि 2014 के लेआउट में 1750 पेड़ कर दिए। बिल्डर मनमानी तरीके से मेनटेनेंस चार्ज भी वसूल रहा है।
खरीदारों ने प्राधिकरण को बताया कि बिल्डर ने अगस्त 2015 में प्राधिकरण को लिखित जानकारी दी कि 1.5 रुपये प्रति वर्ग फुट और सर्विस टैक्स के हिसाब से मेनटेनेंस चार्ज ले रहे हैं, जबकि जनवरी 2015 से ही 2.5 रुपये प्रति वर्ग फुट और सर्विस टैक्स ले लिया जा रहा है। खरीदारों ने प्राधिकरण को बताया कि इन बदलाव पर कभी भी खरीदारों की सहमति नहीं ली गई, जबकि अपार्टमेंट एक्ट के मुताबिक लेआउट में किसी तरह का बदलाव करने पर सभी खरीदारों की सहमति लेनी होती है। एसीईओ ने इन मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।