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Delhi NCR News: बिजली चोरी के आरोप साबित करने में बीएसईएस नाकाम

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- जांच में वीडियो और गवाहों के बयान कमजोर, कोर्ट ने कहा- केवल शक के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता
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संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली। साकेत कोर्ट ने बिजली चोरी के मामले में मोहम्मद अफसर खान और मोहम्मद जुबैर उर्फ टिपू को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि मौके पर बिजली चोरी हो रही थी, लेकिन बीएसईएस यह साबित नहीं कर सकी कि चोरी से दोनों आरोपियों का संबंध था। अदालत ने कहा कि केवल शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रंजीत सिंह की अदालत ने यह फैसला सुनाया। मामला जामिया नगर थाने में दर्ज साल 2019 की एफआईआर से जुड़ा था।


बीएसईएस के अनुसार, 3 जुलाई 2018 को बाटला हाउस में ई-रिक्शा चार्ज करने की जगह की जांच की गई थी। वहां बिजली के खंभे से तार जोड़कर सीधे बिजली ली जा रही थी। मौके पर आठ ई-रिक्शा चार्ज होते मिले थे। बीएसईएस ने बिजली चोरी की रकम करीब 6.20 लाख रुपये बताई थी। अदालत ने माना कि जांच टीम को मौके पर बिजली चोरी के लिए तार जोड़ने के सबूत मिले थे। लेकिन यह साबित नहीं हुआ कि इस चोरी के पीछे अफसर खान और मोहम्मद जुबैर ही थे।
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जुबैर के बारे में गवाहों ने बताया कि वह जांच के समय मौके पर नहीं था। वह जांच के वीडियो में भी दिखाई नहीं देता। बीएसईएस के कर्मचारियों ने भी उसकी मौके पर पहचान नहीं की। उसका नाम सोनू के जरिए सामने आया था, लेकिन सोनू को अदालत में गवाही के लिए पेश नहीं किया गया। अफसर खान को लेकर भी गवाहों के बयान उसके खिलाफ नहीं थे। दो प्रमुख गवाहों ने कहा कि वह मौके पर मौजूद नहीं था।
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वीडियो की जांच में भी कमी
अदालत ने बिजली चोरी की जांच के दौरान बनाए गए वीडियो को लेकर भी सवाल उठाए। वीडियो के साथ लगाया गया प्रमाणपत्र कानून की जरूरी शर्तों को पूरा नहीं करता था। यह साफ नहीं था कि वीडियो किस उपकरण से बनाया गया और उसकी सीडी कैसे तैयार की गई। रिकॉर्ड में छेड़छाड़ नहीं होने का भी जरूरी प्रमाण नहीं था। इसके अलावा आठ ई-रिक्शा जब्त नहीं किए गए और उनके नंबर भी दर्ज नहीं किए गए।
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