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अदालत में भर्ती प्रक्रियाः न्यायाधीश को रिश्वत देने के प्रयास के मामले में दिल्ली पुलिस के एएसआई सहित तीन दोषी करार

Wed, 29 Sep 2021 10:04 AM IST
अनुराग सक्सेना न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अदालत ने ग्रुप सी के पदों की भर्ती मामले में एक न्यायाधीश को रिश्वत देने का प्रयास मामले में दिल्ली पुलिस के एएसआई सहित तीन लोगों को एक दोषी करार दिया है। चौथे आरोपी एमसीडी में स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की मौत हो चुकी है।
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अदालत ने सुनाई सजा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अदालत ने ग्रुप सी के पदों की भर्ती मामले में एक न्यायाधीश को रिश्वत देने का प्रयास मामले में दिल्ली पुलिस के एक सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) सहित तीन लोगों को एक दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश किरण बंसल ने तीन लोगों एएसआई तारा दत्त, मुकुल कुमार व रमेश कुमार को दोषी ठहराया है। मामले में चौथा आरोपी दयानंद शर्मा एमसीडी में स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट था, लेकिन मुकदमे के दौरान उसकी मृत्यु हो गई और उसके खिलाफ कार्रवाई समाप्त हो गई।
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2017 का है ये मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार यह घटना 2017 की है। दोषी दत्त ने तीस हजारी अदालत में 50 हजार रुपये वाला लिफाफा अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंद्र शेखर के साथ संलग्न नायब कोर्ट को देते हुए इसे न्यायाधीश को देने के लिए कहा था। यह लिफाफा उस समय भर्ती समिति के सदस्य रहे जज को दिया जाना था, ताकि वह दिल्ली जिला अदालतों में चपरासी के पद के लिए मुकुल का पक्ष ले सकें। शर्मा पर दत्त से जज की ओर से रिश्वत मांगने का आरोप था।

50 हजार रुपये की रिश्वत देने के लिए उकसाने का आरोप
अदालत ने उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के एक मामले में आपराधिक साजिश रचने का दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष बिना शक सभी आरोपियों का अपराध साबित करने में सफल रहा है। अदालत ने कहा तारा दत्त, मुकुल कुमार और रमेश कुमार ने 50,000 रुपये की राशि स्वीकार करने के लिए न्यायाधीश चंदर शेखर को उकसाने के लिए आपराधिक साजिश रची थी और उपरोक्त आपराधिक षड्यंत्र दत्त के अनुसार सुरेंद्र कुमार के माध्यम से राशि वाला लिफाफा दिया था।
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ग्रुप सी के पद पर निकली थी भर्ती
मुकुल कुमार ने ग्रुप सी के पद के लिए आवेदन किया था। अदालत ने तीनों लोगों को दोषी ठहराते हुए कहा कि नायब कोर्ट की गवाही भरोसेमंद है, आरोपी व्यक्तियों के कॉल रिकॉर्ड से पता चला कि वे उस समय एक दूसरे से संपर्क में थे। इसके अलावा तीस हजारी अदालत में दत्त की उपस्थिति सीसीटीवी फुटेज और उसके मोबाइल फोन लोकेशन से स्पष्ट है कि सभी षडयंत्र में शामिल थे।
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