विश्व मस्तिष्क दिवस पर डॉक्टरों ने दी चेतावनी, 80 प्रतिशत स्ट्रोक को जीवनशैली में बदलाव से कम किया जा सकता है
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बदलती लाइफस्टाइल, तनाव, हाई बीपी, शुगर और धूम्रपान की वजह से अब ब्रेन स्ट्रोक सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही है। 30 से 50 साल के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विश्व मस्तिष्क दिवस के मौके पर सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में डॉक्टरों ने यह जानकारी दी।
एक निजी अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में आने वाले 30 फीसदी से ज्यादा मरीज ब्रेन स्ट्रोक के हैं। भारत में हर साल 12 से 18 लाख नए स्ट्रोक के मामले सामने आते हैं। आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार, हर सात में से एक मरीज की उम्र 18 से 44 साल के बीच है। 40 फीसदी मरीज लक्षण आने के 24 घंटे बाद अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।
न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. सुनील कुमार बरनवाल ने कहा कि स्ट्रोक में हर मिनट की देरी पर करीब 190 करोड़ मस्तिष्क कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। गोल्डन आवर के भीतर इलाज मिलने पर जान बच सकती है और लकवा का खतरा कम हो जाता है।
न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. रजत चोपड़ा ने बताया कि आधुनिक एमआरआई, स्ट्रोक टीम और फिजियोथेरेपी से गंभीर मरीज भी ठीक होकर घर जा रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बीपी-शुगर-कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करके, धूम्रपान छोड़कर व नियमित व्यायाम से 80 प्रतिशत स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता है।