19 वर्ष के बेटे को खोने के बाद उसके अंगों को दान करने का निर्णय लेना कोई आसान काम नहीं था। लेकिन युवक के परिजनों ने हिम्मत दिखाई और ब्रेन डेड घोषित बेटे के सभी अंगों को दान करने का निर्णय लिया। अंग दान से पांच लोगों को नई जिंदगी मिली है।
अंग प्रत्यारोपण के लिए बृहस्पतिवार को दिल्ली के तीन अस्पतालों में हलचल रही। इस कार्य को पूरा करने में पुलिस के अलावा तीनों अस्पतालों के करीब 500 डॉक्टर, नर्सेज, पैरामेडिकल स्टाफ व दूसरे स्टाफ ने अपनी सेवा दी।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में डॉ. बलराम एरॉन की टीम ने दिल्ली की एक 13 वर्षीय बच्ची को हृदय प्रत्यारोपित किया। एम्स में ही डॉ. सुबोध की टीम ने दिल्ली के एक व्यक्ति में किडनी प्रत्यारोपित किया।
एम्स में लिवर प्रत्यारोपण कराने वाला कोई मरीज उस समय मौजूद नहीं था लिहाजा दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बैलियरी साइंसेज में बिहार के एक 60 वर्षीय मरीज को लिवर प्रत्यारोपित किया गया।
यह मरीज इस संस्थान में पिछले छह माह से लिवर दान का इंतजार कर रहा था। दूसरी किडनी पंजाबी बाग स्थित महाराजा अग्रसेन अस्पताल में भर्ती एक मरीज को प्रत्यारोपित किया गया।
सड़क हादसे के बाद युवक को ब्रेन डेड घोषित किया गया था। ऐसी स्थिति में अंग दान करने से पहले मेडिको लीगल केस (एमएलसी) होने की वजह से पुलिस से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होता है।
इसके लिए पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी से संपर्क किया गया। उनकी पहल पर 10 से 15 मिनट में अंगदान के लिए पुलिस की ओर से अनापत्ति प्रमाणपत्र सौंप दी गई।
सड़क हादसे में हो गया था घायल
10 जनवरी-16 को सड़क हादसे में घायल होने के बाद पश्चिम विहार दिल्ली निवासी रविदास (19) को महाराजा अग्रसेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 14 जनवरी को ब्रेन डेड की स्थिति बन गई और प्रक्रिया पूरी करने के बाद शाम करीब साढ़े सात बजे एम्स के ऑर्गेन रिट्रिवल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन (ऑर्बो) के को-ऑर्डिनेटर राजीव मैखुरी को कॉल आई।
एम्स निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा की सलाह और अनुमति के बाद हृदय सर्जरी करने वाले डॉक्टर व अन्य सर्जन से बातचीत की गई। इसके बाद ब्रेन डेड मरीज को महाराजा अग्रसेन अस्पताल से रात करीब ढाई बजे एम्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया और बॉडी से ऑर्गन निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई।
पांच ऑपरेशन थिएटर में चलता रहा काम
जिस दौरान ब्रेन डेड मरीज से ऑर्गन निकाला जा रहा था उस दौरान तीन अलग-अलग अस्पतालों में पांच ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टर अंग प्रत्यारोपण कराने वाले मरीज की सर्जरी करने में जुटे थे। बॉडी से लिवर निकालने के बाद आईएलबीएस ले जाया गया जबकि एक किडनी महाराजा अग्रसेन अस्पताल ले जाया गया।