आर्थिक तंगी से जूझने वाले छात्र पटना (बिहार) के आनंद कुमार की संस्था ‘सुपर-30’ में आकर कैसे आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान) तक पहुंचते हैं। इन छात्रों की सफलता का क्या राज है।
पूरी दुनिया के लिए रहस्य बनी ये बातें अब जल्द ही सबके सामने होंगी। दुनिया भर में मशहूर गणितज्ञ आनंद कुमार खुद परत दर परत अपनी जीवनी और ‘सुपर-30’ के बारे में बताएंगे।
गुड़गांव की प्रकाशन कंपनी पेंग्विन रैंडम हाउस इस पर आधारित पुस्तक तैयार कर इस साल नवंबर में बाजार में उतारेगी। दरअसल, ‘सुपर-30’ गरीब बच्चों का आईआईटी में पढ़ने का सपना सच करने वाली संस्था के रूप में उभर कर आई है।
संस्था बीते सात सालों में 360 गरीब छात्रों को देश के विभिन्न आईआईटी में प्रवेश दिला चुकी है। इसकी सफलता के पीछे की कहानी क्या है, इससे बहुत कम लोग ही वाफिक है।
आनंद पर लिखी पहली किताब
ऐसे में प्रकाशक ने हिंदी और अंग्रेजी में किताब प्रकाशित करने का निर्णय लिया है। इसके बाद इसे अन्य भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा। प्रकाशक का दावा है कि आनंद पर लिखी गई यह पहली किताब होगी।
अभी तक कई प्रकाशक उनकी जीवनी छापने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन किसी को मौका नहीं मिला। ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय में क्लीनिकल एसोसिएट कनाडा के लेखक डॉ. बीजू मैथ्यू ने आनंद की प्रेरणादायी कहानी को एक पुस्तक का रूप दिया है।
मैथ्यू द्वारा लिखित इस पुस्तक का संपादन रॉबर्ट प्रिंस ने किया है। इसके अलावा पटना के वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार ने पुस्तक लेखन में सहयोग किया है। प्रकाशक का कहना है कि आनंद कुमार ने इस पुस्तक से प्राप्त आय का इस्तेमाल सुपर-30 के कल्याण के लिए करने का वादा किया है।
कैसे बना सुपर-30
किताब की संपादक राधिक मारवाह कहती हैं कि किताब का मूल रूप अंग्रेजी में है। पिछले तीन वर्षों से मैथ्यू ने लगातार पटना जाकर सुपर-30 पर शोध किया है। वे यहां पढ़े कई बच्चों के घर भी गए, जो आज आईआईटी से तालीम ले रहे हैं।
250 पेज की यह किताब आनंद की पृष्ठभूमि, उनके पिता की असामयिक मौत, जिसने उन्हें कैंब्रिज में उच्च शिक्षा प्राप्त करने से रोक दिया, के बाद के संघर्ष को रेखांकित करेगी।
आनंद कुमार उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए कैंब्रिज यूनिवर्सिटी जाना चाहते थे, लेकिन पोस्टल विभाग, पटना में कार्यरत पिता राजेंद्र प्रसाद की वर्ष 1994 में मृत्यु होने के कारण वे नहीं जा सके।
पिता की मौत के बाद भी नहीं की नौकरी
पिता की मृत्यु के बाद उनकी जगह नौकरी करने का बुलावा आया, लेकिन आनंद नहीं गए। उनके मन में विचार आया कि नौकरी करने की बजाय वह गरीब परिवार के बच्चों को आगे बढ़ाकर अपना वह सपना पूरा करेंगे, तो वह पूरा नहीं सके।
इस सोच को साकार करने के लिए उन्होंने वर्ष 2002 में पटना के मीठापुर में ‘सुपर-30’ की शुरुआत की। इसमें गरीब बच्चों को आवासीय सुविधा के साथ आईआईटी में प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराई जाती है।
वे अब तक 360 बच्चों को कोचिंग दे चुके हैं। इनमें से 308 बच्चे आईआईटी के लिए चयनित हो चुके हैं। वहीं चार बच्चे यूपीएससी में भी चयनित हुए हैं।
खास बात:
-‘सुपर-30’ पर कई डॉक्यूमेंट्री फिल्में बन चुकी हैं।
-देश और दुनिया में उन्हें कई अवार्ड मिल चुके हैं।
-आनंद कुमार कैंब्रिज में गणित पर विशेष व्याख्यान दे चुके हैं।
-अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्र और पत्रिकाओं में आनंद के साक्षात्कार छपे हैं।
-टाइम पत्रिका की ओर से ‘सुपर-30’ एशिया का सबसे बेहतर संस्थान घोषित हो चुका है।
-यूके की मोनोकल मैग्जीन ने आनंद कुमार को दुनिया के टॉप-20 शिक्षकों की सूची में शामिल किया है।