अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग में बढ़ी आधुनिक सुविधाएं, घटेगा मरीजों का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मूत्राशय (ब्लैडर) की समस्याओं से जुझ रहे मरीजों को सफदरजंग अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग में आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी। यहां ब्रेन की मैपिंग के साथ ब्लैडर का इलाज होगा। इसके लिए अस्पताल में सीएसआर फंड के सहयोग से सुविधाओं का विस्तार किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि उम्र बढ़ने, रीढ़ की हड्डी में चोट लगने व न्यूरो संबंधित रोग के कारण मूत्राशय में परेशानी बढ़ती है।
सफदरजंग में यूरोलॉजी विभाग में आने वाले करीब 30 फीसदी मरीजों में यह समस्या देखी गई है। इन मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल में निकट अवरक्त स्पेक्ट्रोस्कोपी युक्त वीडियो यूरोडायनामिक मशीन लाई गई है। इसमें मरीज के ब्रेन की मैपिंग के साथ मूत्राशय का इलाज किया जा सकता है। ब्रेन की मैपिंग के दौरान व्यक्तिगत आधार पर मरीज में समस्या के कारण का पता लगाया जा सकेगा। साथ ही उसी आधार पर उन्हें इलाज भी दिया जा सकता है। इससे मरीजों का इंतजार घटेगा।
वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल ने बृहस्पतिवार को पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के साथ समझौता किया। इसमें कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत पांच तरह के उपकरण मिले हैं। इसमें निकट अवरक्त स्पेक्ट्रोस्कोपी युक्त वीडियो यूरोडायनामिक मशीन के अलावा ट्रिलॉजी लिथोट्रिप्टर (दो ऊर्जा रूपों और सक्शन का एक साथ उपयोग कर उन्नत पथरी तोड़ने वाला), थुलियम फाइबर लेजर मशीन (प्रोस्टेट की लेजर सर्जरी और आरआईआरएस (रेट्रोग्रेड इंट्रारेनल सर्जरी) प्रक्रियाओं), पोर्टेबल मोबाइल एंडोस्कोपी मशीन (अत्याधुनिक 3-इन-1 एंडोस्कोपी प्रणाली से अस्पताल में एंडोयूरोलॉजिकल आपातकालीन सेवाएं शुरू होगी) और उन्नत डायग्नोस्टिक उपकरण (एक फ्लैट पैनल सी आर्म, नेफ्रोस्कोप सेट और रिसेक्टोस्कोप सेट) शामिल है। इन पांच तरह के उपकरण की मदद से करीब 70-80 फीसदी मूत्र संबंधी प्रक्रियाओं को बेहतर तरीके से उपलब्ध करवाया जा सकेगा।
इस मौके पर अस्पताल के निदेशक डॉ. संदीप बंसल ने कहा कि नई सुविधाओं से अस्पताल में इलाज की गुणवत्ता में सुधार होगा। वहीं, पावरग्रिड के कार्यकारी निदेशक (सीएसआर) जसबीर सिंह ने कहा कि संस्थान उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकी में निवेश कर रोगियों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास कर रहा है। इस मौके पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारु बाम्बा, अतिरिक्त एमएस डॉ. आर. पी. अरोड़ा, डॉ. कृष्ण कुमार, डॉ. रेखा तिर्की, डॉ. तिलक राज सहित अन्य उपस्थित रहे।
सैकड़ों मरीजों को मिलेगा फायदा
यूरोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख डॉ. पवन वासुदेवा ने कहा कि विभाग की ओपीडी में हर सप्ताह एक से डेढ़ हजार मरीज इलाज करवाने आते हैं। इनमें करीब 30 फीसदी में मूत्राशय संबंधित समस्याएं होती हैं। इन नए उपकरणों से विभाग में सुविधाओं में विस्तार होगा। साथ ही मरीजों का इंतजार भी कम होगा। उन्होंने कहा कि नए उपकरण आधुनिक सुविधाओं से लैस है। यह जटिल प्रकियाओं को भी सटीकता से पूरा करने में मददगार होंगी। यहां एक साथ निदान प्रक्रियाएं संभव होंगी जो पहले भारत में उपलब्ध नहीं थीं। न्यूनतम इनवेसिव सर्जिकल विकल्पों के माध्यम से उपचार के परिणामों में सुधार होगा।