फरीदाबाद सीट पर भाजपा को ‘कमल’ खिलाना कड़ी चुनौती होगी। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों में कम से कम 75 बूथों पर पार्टी की हालत खस्ता थी, इन पर पकड़ बनाने के लिए पार्टी को जमीनी स्तर पर काम करना होगा।
पिछले चुनाव में पांच ऐसे बूथ थे, जिनमें पार्टी का खाता तक नहीं खुला था, जबकि वहां कांग्रेस एवं अन्य पार्टियों को अच्छे वोट मिले थे। पार्टी दावा करती है कि उसका शहरी क्षेत्रों में जनाधार अच्छा है। इसके बावजूद पॉश सेक्टरों के दो बूथों पर सिर्फ पांच-पांच वोट से संतोष करना पड़ा था।
आंकड़ों पर गौर किया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की हालत बेहद खराब रही। हथीन विधानसभा में सबसे दयनीय स्थिति रही। इतना ही नहीं जिस तिगांव क्षेत्र से भाजपा के एकमात्र विधायक कृष्णपाल गुर्जर चुने गए, वहां भी हालत कुछ ज्यादा अच्छी नहीं रही।
भाजपा उद्योग प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सह संयोजक मनमोहन गुप्ता कहते हैं कि पिछले चुनाव की बात और थी। अब मोदी की आंधी चल रही है। कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है। ऐसे में अब कोई ऐसा बूथ नहीं होगा, जिसमें पार्टी को वोट न मिले। जहां वोट कम मिले हैं वहां पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।