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राखी बिड़लान-भाजपाइयों के बीच मारपीट

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दिल्ली में आम आदमी पार्टी की विधायक राखी बिड़लान और निगम पार्षद संजना सिंह के बीच सोमवार को रोहिणी सेक्टर-3 में झड़प हो गई। दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कराया है।
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जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह निगम पार्षद संजना सिंह स्वच्छता अभियान के तहत रोहिणी सेक्टर-3 में सफाई करवा रही थीं। उनके साथ निगम के सफाई कर्मचारी व पार्टी कार्यकर्ता भी थे।

इसी बीच विधायक राखी बिड़लान भी अपने समर्थकों के वहां पहुंची। उन्होंने सफाई कर्मियों से बातचीत शुरू कर दी है। इस बीच किसी बात को लेकर संजना सिंह व राखी के बीच कहासुनी हो गई। बहस इतनी तीखी हुई कि नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। दोनों पार्टियों के समर्थन आपस में भिड़ गए।
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दोनों ने एक दूसरे पर मारपीट का मामला दर्ज कराया

सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों का शांत कराया। निगम पार्षद संजना सिंह का आरोप है कि  राखी ने सफाई अभियान में बाधा डालने की कोशिश की। इसका विरोध करने वह झगड़े पर उतर आईं।

पार्षद ने बताया कि बिड़लान को आपत्ति थी कि वह इलाके की विधायक हैं, उन्हें इसमें क्यों नहीं बुलाया गया। जब उनसे यह कहा कि यह निगम का काम है वह बीच में दखल न दें इस पर वह धक्का-मुक्की करने लगी।

दूसरी तरफ राखी का आरोप है कि वह पदयात्रा कर रही थीं। उन्होंने सफाई कर्मियों से बातचीत कर उनका हालचाल लेने की कोशिश की।

उन्हें जानकारी मिली थी कि सफाई कर्मियों से जबरन काम कराया जा रहा है। यह बात संजना सिंह को नागवार गुजरी और अपशब्द कहने लगी। इतना ही नहीं, आपत्तिजनक जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने धक्का-मुक्की भी की।
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आप विधायक की सुविधाएं वापस लेने पर रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें आम आदमी पार्टी के विधायक सुरेंद्र सिंह को अपने परिसर में बने कार्यालय को खाली करने को कहा था। साथ ही अदालत ने एनडीएमसी को निर्देश दिया कि निर्वाचित सदस्य के रूप में उसे प्रदान की जा रही सभी सुविधाएं जारी रखी जाएं।

न्यायमूर्ति मनमोहन एनडीएमसी व केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर छह हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। अदालत ने यह निर्देश आप विधायक सुरेंद्र सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। सिंह ने एनडीएमसी द्वारा उसे प्रदान सुविधाओं को वापस लेने के संबंध में पास प्रस्ताव को रद्द करने की मांग की है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने एनडीएमसी के अधिवक्ता से कहा कि सच्चाई है कि याची के लिए कार्यालय जरूरी है, वह बिना कार्यालय के कैसे काम कर सकते हैं। विधायक उनसे मिलने के लिए आने वाले 100 लोगों से घर पर नहीं मिल सकते। घर पर आने वालों को चाय पानी किस प्रकार प्रदान किया जा सकता है।

ऐसे काम के लिए कार्यालय जरूरी है। अदालत ने निर्देश दिया कि अगले आदेश तक कार्यालय को खाली न करवाया जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 10 मार्च 2015 तय की है। दिल्ली कैंट क्षेत्र से विधायक सुरेंद्र सिंह ने एनडीएमसी द्वारा उसे अपने कार्यालय को खाली करने के संबंध में एक व सात अक्तूबर को दिए नोटिस को चुनौती दी है।
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