हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव के परिणाम रविवार को आने हैं। उससे पहले राजनीतिक दल दिल्ली में सरकार बनाने, राष्ट्रपति शासन कायम रखने या विधानसभा भंग करके चुनाव में कूदने पर जोड़ घटाव में जुट गए हैं।
भाजपा के पक्ष में परिणाम आते हैं तो चुनाव कराए जाने के डर से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी गठजोड़ पर भी एक धड़ा काम काम रहा है। हालांकि कांग्रेस में कुछ बड़े नेता इसके खिलाफ भी हैं।
सूत्र बताते हैं कि दिल्ली की राजनीति में रविवार को कोई बड़ी उथल-पुथल सामने आ सकती है। हरियाणा व महाराष्ट्र के चुनाव रुझान के साथ ही राजधानी में सरकार बनाने को लेकर कोई नया समीकरण सामने आ सकता है।
फिर साथ आएंगी AAP और कांग्रेस?
कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि आप और कांग्रेस के बीच बातचीत कई स्तर पर है। क्योंकि आप और कांग्रेस के विधायक किसी भी कीमत पर चुनाव में अभी जाना नहीं चाहते। हालांकि भाजपा के नेता इस बात से जरूर अभी डर रहे हैं कि अगर हरियाणा में मोदी लहर नहीं दिखी तो दिल्ली में आप हाथ मार सकती है।
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर आप को बड़ी पार्टी नहीं बनने देना चाहती। ऐसे में यह कोशिश होगी कि अभी चुनाव न हों। क्योंकि चुनाव हुए तो आप के सदस्य और बढ़ सकते हैं। फिर कांग्रेस तीसरी पार्टी बन जाएगी। क्योंकि जिन राज्यों में भी क्षेत्रीय दल बढ़े हैं, वहां कांग्रेस उठकर खड़ी नहीं हो पाई है।
यही वजह है कि गैर सांप्रदायिक सरकार के नाम पर कांग्रेस फिर सरकार को बाहर से समर्थन का पासा फेंक सकती है। हालांकि अरविंद केजरीवाल की बजाय मुख्यमंत्री बदलने की मांग कांग्रेस जरूर रख सकती है।
भाजपा ने बनाया चुनाव कराने का मन!
महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल से उत्साहित भाजपा ने दिल्ली में जोड़ तोड़कर से सरकार बनाने के बजाय चुनाव कराने का मन बना लिया है। उनकी कोशिश है कि जनवरी में चुनाव करा लिए जाएं। क्योंकि कांग्रेस व आम आदमी पार्टी में टूट होती नहीं दिख रही है।
इस संबंध में प्रदेश भाजपा के नेताओं ने शुक्रवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित दीपावली मिलन कार्यक्रम में संकेत दिए। प्रदेश स्तर के बड़े नेताओं ने दो टूक कहा कि अब चुनाव ही रास्ता बचा है। इस संबंध में पार्टी आलाकमान को भी अवगत करा दिया गया है।
इन नेताओं का मानना है कि मतदाताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू बरकरार है। एक नेता ने तो 60 सीटें आने का दावा किया। जबकि प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय पूरे प्रकरण पर चुप्पी साधे रहे। जबकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य पर पार्टी रुख के बारे में विधायक नंदकिशोर के साथ काफी देर तक विचार विमर्श करते दिखे।