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भाजपा नेता तेवतिया को वेंटिलेटर से हटाया, हालत में सुधार के बाद खोली आंखें

Wed, 17 Aug 2016 01:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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teotia - फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद में बदमाशों की गोली का शिकार हुए भाजपा नेता ब्रजपाल तेवतिया की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें वेंटिलेटर से हटा दिया गया है और जल्द ही वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा। 
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सूत्रों के मुताबिक, तेवतिया को आठ गोलियां लगी थीं। वहीं उनके साथ घायल एक गनर की हालत अभी भी गंभीर है, जबकि दूसरे की हालत खतरे से बाहर है। 

उधर, पुलिस की 20 से भी अधिक टीमें ब्रजपाल व उनके साथियों पर हमला करने वाले बदमाशों का पता लगाने में जुटी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एक से दो दिन में आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा कर दिया जाएगा। 

गौरतलब है कि बृहस्पतिवार शाम एक शोकसभा से वापस आ रहे भाजपा नेता ब्रजपाल तेवतिया की गाड़ी को अज्ञात हमलावरों ने ओवरटेक कर एके-47 और 9 एमएम की पिस्टल से ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस हमले में तेवतिया समेत उनके पांच गनर व ड्राइवर भी घायल हो गए थे।
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चौथे ऑपरेशन के बाद आया है सुधार
शुक्रवार को तीन ऑपरेशन करने के बाद तेवतिया का शनिवार को चौथा ऑपरेशन किया गया। इस दौरान उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। डॉक्टरों के अनुसार, ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद तक उनकी हालत नाजुक थी, लेकिन मंगलवार को हालत में काफी सुधार आया।
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तीन मिनट की देरी से जा सकती थी जान 

ब्रजपाल तेवतिया - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने आंखें खोली। इसके बाद उन्हें वेंटिलेटर से हटा दिया गया है। तेवतिया की हालत पर डॉ. वैभव और उनकी टीम लगातार नजर रख रही है। 

चढ़ाया गया 40 यूनिट ब्लड
फोर्टिस अस्पताल में तेवतिया के इलाज के दौरान 40 यूनिट ब्लड चढ़ाया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, एक इंसान के लिए 11 से 12 यूनिट ब्लड काफी होता है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेता को 8 गोलियां लगी थीं। इस वजह से उनका काफी ब्लड निकल चुका था। काफी प्रयास करने के बाद ही ब्लड रोका जा सका था।


तीन मिनट की देरी से जा सकती थी जान 
बताते हैं कि जिस वक्त ब्रजपाल तेवतिया को गाजियाबाद से नोएडा लाने का फैसला किया गया तो सबसे पहले यही बात आई कि जाम न लगे। इसके लिए गाजियाबाद और नोएडा पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया। 

बिना देर किए गाजियाबाद से नोएडा अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने जैसे ही प्राथमिक जांच शुरू की तो हाथ से नब्ज गायब हो चुकी थी। दिल की धड़कन देखने पर पता चला कि हल्की सी हरकत हो रही थी। 

आधुनिक उपकरणों की मदद से तेवतिया को मेडिकल सपोर्ट दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें अस्पताल तक लाने में तीन मिनट की और देरी हो जाती तो जान बचानी मुश्किल हो जाती। उन्हें ज्यादातर गोलियां कंधे के आसपास ही लगी थीं। 
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