आम आदमी पार्टी के स्टिंग बम ने दिल्ली में सरकार बनाने की मुहिम में पलीता लगा दिया है। इससे सरकार बनाने को हरी झंडी देने वाले केंद्रीय नेताओं को जवाब देते भारी पड़ रहा है।
आम आदमी पार्टी के स्टिंग ऑपरेशन से भाजपा की छवि को काफी धक्का लगा है। पिछले एक सप्ताह से दिल्ली में सरकार बनाने की मुहिम में जुटे भाजपा नेताओं का जोश अब ठंडा पड़ गया है। क्योंकि अब उन्हें यह डर सता रहा है कि अगर सरकार बनी तो आम जनता में यही संदेश जाएगा कि भाजपा ने खरीद-फरोख्त कर ही सरकार बनाई है।
भाजपा के रणनीतिकारों का भी मानना है कि ऐसे माहौल में सरकार बनाना कही से जायज नहीं है। क्योंकि खरीद-फरोख्त करके सरकार बनाने का आरोप न केवल आम आदमी पार्टी बल्कि कांग्रेस भी लगा रही है।
AAP ने संघ को भी घेरा
सीक्रेट वोटिंग के माध्यम से भी अगर सरकार बनती है तो यही संदेश जाएगा कि भाजपा ने अंदरखाने अन्य पार्टी के विधायकों को लालच दिया है।
उधर, पार्टी के कुछ नेताओं का यह भी कहना है कि दिल्ली में अगर जोड़तोड़ कर सरकार बनती है तो इसकी आंच केंद्र सरकार पर भी पड़ेगी। इतना ही नहीं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी इससे दूर नहीं रह पाएगा। क्योंकि आम आदमी पार्टी ने संघ पर भी आरोप मढ़ा है।
पार्टी को यह भी डर सता रहा है कि अगर आम आदमी पार्टी इस तरह की दूसरी स्टिंग को पेश कर देती है तो और मुश्किल का सामना करना पड़ेगा।
वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा है कि भाजपा किसी भी रूप में जोड़तोड़ या लेनदेन में विश्वास नहीं रखती है। पार्टी इस प्रकार की गतिविधि के लिए किसी भी कार्यकर्ताओं को मान्यता नहीं देती है।
एलजी को नहीं मिला ग्रीन सिग्नल
दिल्ली में सरकार गठन को लेकर उपराज्यपाल नजीब जंग की रिपोर्ट पर गृहमंत्रालय से सोमवार को भी कोई ग्रीन सिग्नल नहीं मिला। इसलिए भाजपा को सरकार बनाने पर राजनिवास से कोई न्यौता भी नहीं आया। इसे आम आदमी पार्टी के स्टिंग ऑपरेशन के खुलासे से जोड़कर देखा जा रहा है।
वहीं मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में सामने आने वाले तथ्य पर राजनीतिक दलों की निगाहें टिकी रहेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार स्टिंग ऑपरेशन की मार और मंगलवार से शुरू हो रहे पितृपक्ष ने दिल्ली में सरकार गठन की दुविधा और बढ़ा दी है।
हालांकि एक वर्ग अभी भी भाजपा की तरफ से स्टिंग ऑपरेशन का दाग धुलने का रास्ता निकालने की बात कर रहा है। दिल्ली के राजनीति को नजदीक से जानने वाले कांग्रेस और भाजपा के नेता भी मानते हैं कि अब भाजपा के लिए रास्ता आसान नहीं रहा।
सरकार गठन को लेकर कोई फैसला लेने से पहले केंद्रीय नेतृत्व चार राज्यों के चुनावी प्रभाव का आंकलन भी जरूर करेगा। वहीं भाजपा पितृपक्ष में सरकार बनाने का फैसला नहीं लेगी। मसलन कोर्ट का कोई सीधा फैसला या निर्देश नहीं मिला तो अगले पंद्रह दिन मामला यूं ही झूलता दिख रहा है।