हरियाणा चुनाव में एनसीआर के दोनों जिलों में मोदी लहर का असर साफ दिखा और भाजपा ने 16 में से 7 सीटों पर कब्जा किया। फरीदाबाद और गुड़गांव में भाजपा का रंग जमा लेकिन पलवल जिले की तीनों सीटें भाजपा के हाथ से निकल गईं।
गुड़गांव एवं मेवात की सात सीटों के चुनाव परिणाम आने के साथ पार्टियों के नफा-नुकसान की तस्वीर साफ हो गई है। एक तरफ जहां भाजपा को चार सीटों का फायदा हुआ, वहीं इनेलो को अपनी एक सीट गंवानी पड़ी।
परिवहन मंत्री आफताब अहमद को शिकस्त का सामना करना पड़ा। दूसरी तरफ, इस बार कुछ नए चेहरे विधानसभा में गुड़गांव एवं मेवात के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते दिखेंगे।
कांग्रेस-इनेलो की सीटों पर भाजपा का कब्जा
पिछले विधानसभा चुनाव में सात में से तीन कांग्रेस और तीन सीटें इनेलो की झोली में गईं थीं। गुड़गांव से सुखबीर कटारिया निर्दलीय जीते थे। इस बार भी सात में से एक सीट आजाद उम्मीदवार के पास गई है।
फर्क इतना है कि सीट बदल गई। इस दफा पुन्हाना से रहीश खान निर्दलीय उम्मीदवार की हैसियत से जीते हैं। पिछली बार निर्दलीय चुनाव जीतने वाले इस बार बुरी तरह हार गए।
2009 के चुनाव में गुड़गांव के पटौदी से इनेलो के पटौदी से गंगाराम, फिरोजपुर झिरका से नसीम अहमद और पुन्हाना से मोहम्मद इलियास जीते थे। इस दफा इनेलो को एक सीट का नुकसान हुआ है। एक सीट इसने कांग्रेस से छीनी है।
पटौदी से गंगाराम भाजपा की बिमला देवी से हार गए। दूसरी तरफ नसीम ने अपनी सीट बनाए रखी। नूंह में इनेलो के जाकिर ने कड़े मुकाबले में कांग्रेस के आफताब अहमद को हराया।
जाकिर को मिली है जीत की संजीवनी
गुड़गांव की बादशाहपुर और सोहना सीट कांग्रेस के पास थी। इन सीटों को भाजपा ने कांग्रेस से छीना है। कई चुनाव हार चुके राव नरबीर ने बादशाहपुर सीट कांग्रेस और इनेलो से कड़ी टक्कर के बाद छीन ली।
दूसरी तरफ गुड़गांव जिले के भाजपा अध्यक्ष तेजपाल ने सोहना सीट कांग्रेस से छीनी है। वह पहली बार विधायक चुने गए हैं। इसी तरह उमेश अग्रवाल, रहीशा खान एवं विमला देवी को भी पहली दफा विधायक चुने जाने का अवसर मिला।
इस चुनाव में नूंह से सफलता पाने के बाद जाकिर हुसैन का भी सियासी सूखा खत्म हो गया। वह लगभग दो दशकों से लोकसभा एवं विधानसभा के चुनाव हारते आ रहे हैं।
पहली बार खुला बसपा का खाता
फरीदाबाद की नौ विधानसभा सीटों में कांग्रेस और भाजपा के खाते में तीन-तीन सीटें आईं। दो सीटों पर इनेलो प्रत्याशियों ने कब्जा किया तो एक सीट लेकर बसपा ने जिले में पहली बार अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
पृथला सीट से बसपा के टेकचंद शर्मा (37173 वोट) ने भाजपा के नयन पाल रावत को 1176 वोटों से हराया। एनआईटी विधानसभा सीट 45740 वोट पाकर नागेंद्र भड़ाना ने जीती। उन्होंने निवर्तमान श्रममंत्री पं. शिव चरन लाल शर्मा को 2914 वोटों से हराया। पं. शिव चरन लाल शर्मा निर्दलीय उम्मीदवार थे।
बडख़ल विधानसभा की बागडोर 70218 वोटों के साथ जनता ने भाजपा की सीमा त्रिखा को सौंपी। कांग्रेस के महेंद्र प्रताप 33609 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
भाजपा को कहीं जीत तो कहीं मिली हार
बल्लभगढ़ विधानसभा से 69074 वोटों के साथ भाजपा के मूलचंद विधायक बने। उन्होंने कांग्रेस के लखन सिंगला को 53098 वोटों के अंतर से पीछे छोड़ा। फरीदाबाद विधानसभा सीट 72679 वोटों के साथ भाजपा के विपुल गोयल ने अपने नाम की। कांग्रेस के आनंद कौशिक को उन्होंने 44781 वोटों के अंतर से मात दी।
तिगांव से 55408 वोट लेकर कांग्रेस के ललित नागर विधायक बने। उन्होंने भाजपा के राजेश नागर को 2938 वोटों से हराया। हथीन की जनता ने 44673 वोटों के साथ इनेलो के केहर सिंह को विधायक चुना। भाजपा के हर्ष कुमार 38304 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे।
कांग्रेस के उदयभान 50723 वोट के साथ होडल के विधायक बने। उन्होंने इनेलो के जगदीश नायर को 11680 वोटों से हराया। कांग्रेस के करन सिंह दलाल 43955 वोटों के साथ पलवल के विधायक बने। भाजपा के दीपक मंगला उनसे 503 वोटों के अंतर से हारे।