मावे और दूध से बनी मिठाईयों से इस दीपावली तौबा करें। क्योंकि मिलावट का जहर इनके जरिए आपके में शरीर में पहुंच सकता है। मावे और दूध की मिठाई की जगह स्वादिष्ट मिठाईयों के ढेर सारे विकल्प हैं, जो मरीजों के अलावा स्वस्थ व्यक्ति की सेहत के लिए भी अच्छे हैं।
खजूर की मिठाई
बाजार में अच्छी दुकान से खजूर की मिठाई खरीद सकते हैं। इसके अलावा घर में भी खजूर की मिठाई बना सकते हैं। खजूर के बीज को निकालकर खाली स्थान में मिल्क पाउडर डाल दें और इसे मेवे से सजा दें। खजूर प्राकृतिक तौर पर खुद इतना मीठा होता है, कि इसे मीठा करने की जरूरत नहीं होती।
गाजर का हलुवा
ठंड के साथ ही बाजार में गाजर आनी शुरू हो गई है। गाजर के हलवे में चीनी की जगह शहद और मिल्क पाउडर का इस्तेमाल करें। सब्जियों जैसे सोयाबीन से बना मिल्क पाउडर बाजार में मिलता है, यह सेहत के लिए फायदेमंद हैं।
शहद में फ्रुक्टोज होता है, जिसे खून में घुलने के लिए तुरंत और ज्यादा मात्रा में इंसुलिन की जरूरत नहीं पड़ती। साथ ही शहद प्री बायोटिक है। यह आंतों में जाकर अच्छे बैक्टीरिया बनाता है, जिससे गंदे बैक्टीरिया नहीं पनप पाते हैं।
अंजीर की मिठाई
अंजीर की मिठाई बना सकते हैं। सूखे अंजीर को पानी में भिगो कर इसे मसल ले। गीला मिल्क पाउडर, सोयाबीन मिल्क पाउडर या सामान्य मिल्क पाउडर और शहद डालकर मिठाई तैयार करें।
मल्टीग्रेन लड्डू
गेंहू के आटे में दो से तीन अलग प्रकार का आटा मिलाए। उदाहरण के तौर पर जौ का आटा इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें शहद, गोंद और कैल्शियम बढ़ाने के लिए बादाम मिला दें और लड्डू तैयार करें। शहद के अलावा मीठा पन पैदा करने के लिए खांड (ब्राउन शुगर) का इस्तेमाल कर सकते हैं।
मावा भी बना सकते हैं
आपको थोड़ी मेहनत करनी होगी, इसके लिए शहर से हटकर गांव में पता करें कि भैंस या गाय का शुद्ध दूध कहां मिलता है। थोड़े ज्यादा पैसे खर्च करके अपनी आंखों के सामने दूध निकलवाएं। घर लाकर उससे मावा बनाएं। उस मावे से लौकी की मिठाई, हलवा बना सकते हैं। इसके अलावा चीनी मिलाकर पेड़ा भी बनाए जा सकते हैं। खाने में भी स्वादिष्ट होंगे साथ ही सेहत को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा।
सेहत मंद मिठाई खाएं
डायबिटीज और दिल के रोगियों के लिए घर पर इस तरह की तमाम तरह की मिठाई तैयार की जा सकती हैं। रोगी इनका सेवन सीमित मात्रा में ही करें। स्वस्थ लोगों को भी घर पर बनी सेहत के लिए लाभदायक मिठाईयां ही खानी चाहिए। -डॉ.इरम, एचओडी, डिपार्टमेंट ऑफ फूड टेक्टोनॉली,अप्लाईड साइंस, भास्कराचार्य कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी