गुड़गांव और मेवात की सात विधानसभा सीटों में कांग्रेस, इनेलो एवं भाजपा की ओर से टिकट बंटवारे में चूक का असर चुनाव परिणाम पर साफ दिखा। टिकट बंटवारे में जहां कांग्रेस से अधिकांश सीटों पर चूक हुई, वहीं भाजपा ने मेवात में और इनेलो ने सोहना में टिकट देते समय दूरदर्शिता नहीं दिखाई। सोहना सीट से किशोर यादव जैसे कमजोर प्रत्याशी को इनेलो द्वारा उतारा जाने की निरंतर आलोचना हो रही थी। यह सीट मेव एवं गुर्जर बहुल क्षेत्र है।
यादव की पकड़ न तो मेव में मानी जाती है और न ही जातीय समीकरण के आधार पर गुर्जर उन्हें वोट देने वाले थे। फिर भी इनेलो ने किशोर यादव को मैदान में उतार दिया।
कांग्रेस ने गुड़गांव, बादशाहपुर, पटौदी, फिरोजपुर झिरका और पुन्हाना में भी प्रत्याशी चुनने में गलती कर दी। कांग्रेस को पुन्हाना में सुभान खान की जगह वहां से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले रहीशा खान को मैदान में उतारना चाहिए था। इसी तरह झिरका में आजाद मोहम्मद को टिकट देने की बजाय कांग्रेस के बागी ममन खान इंजीनियर या अमन अहमद को टिकट दिया जाना चाहिए था। ममन तो वहां से इनेलो के सीटिंग एमएलए नसीम अहमद को मतगणना के अंतिम दौर तक टक्कर देते रहे।
कांग्रेस में गुड़गांव में एक ऐसे व्यक्ति को टिकट दे दिया, जिसका चुनावी गतिविधियां शुरू होने तक कोई अता-पता नहीं था। इस चुनाव में वह सबसे बुजुर्ग उम्मीदवार थे। टिकट लेने से पहले वह खुद कह चुके थे कि उनकी चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं। लेकिन जब टिकट लेनी की बारी आई वे सबसे आगे खड़े मिले।
इन्हें टिकट मिलने के बाद ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव से हाथ खींच लिया था। इसलिए काउंटिंग में कांग्रेस के धर्मवीर गाबा कहीं टिके ही नहीं।
यही हाल कांग्रेस का हाल बादशाहपुर में रहा। क्योंकि विधायक पुत्र टिकट मिलने के साथ ही रेस से बाहर हो गए थे। जबकि मुकेश अंतिम समय तक टक्कर देते रहे। इसी तरह पटौदी से कांग्रेस ने पूर्व विधायक रामबीर सिंह को मैदान में उतारा होता तो तस्वीर बदली हुई होती। इसी तरह भाजपा ने मेवात में टिकट देने में समझदारी नहीं दिखाई।