आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के दिल्ली के मुख्यंत्री पद से इस्तीफे और राजधानी में राष्ट्रपति शासन लागू हुए छह महीने बीत चुके हैं लेकिन अब भी यहां विधानसभा चुनाव होने की कोई सूरत नहीं दिखती।
इस बारे में अटकलबाजियों का दौर जारी है। जबकि इस दौरान विधायकों को खरीदने और आम आदमी पार्टी में फूट डालने की भाजपा की कोशिशें सामने आ चुकी हैं।
अब इस बात की चर्चा गर्म है मोदी की लोकप्रियता में कमी और कुछ राज्यों में विधानसभा उपचुनावों में भाजपा की हार ने उसके कार्यकर्ताओं को और हताश कर दिया है। वह किसी भी तरह सौदेबाजी करके या फिर आप के विधायकों को लालच देकर दिल्ली में सरकार बनाने की जुगत में है।
'आप' विधायकों के तोड़े बगैर दिल्ली में भाजपा की सरकार कतई नहीं बन सकती। सोमवार को अरविंद केजरीवाल ने एक वेबसाइट से कहा उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि अगर मोदी लहर की वजह से भाजपा को लोकसभा में भारी जीत मिली तो अब क्यों वह विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरने से कतरा रही है। क्या उसे हारने का डर लगा हुआ है।
भाजपा को पता है दिल्ली की हकीकत?
दरअसल भाजपा नेताओं को अच्छी तरफ पता है कि नतीजे क्या होंगे इसलिए वह दिल्ली में तमाम हथकंडे अपना कर सरकार बनाने की जुगत में लगे हैं। उनका कहना था कि सत्ता के लिए भाजपा किसी भी हद तक जा सकती है।
दिल्ली में सरकार न बनने देने के मामले में लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ चुकी है। पिछले दिनों उन्होंने दिल्ली में राष्ट्रपति शासन का समर्थन करते हुए कहा था कि चुनाव हुए तो विकास के काम रूक जाएंगे। यहां तक कि वह दिल्ली में भाजपा की अल्पमत वाली सरकार भी बनाने का विकल्प तलाश रहे हैं।
आम आदमी पार्टी उन पर भाजपा के हाथों में खेलने का आरोप लगा चुकी है। विधायकों को खरीदने की कोशिश से भले ही भाजपा की छवि खराब हो रही है लेकिन चुनाव टलते जाने की वजह से आम आदमी पार्टी को दोबारा संगठित होने का मौका मिल रहा है। लोगों में यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि भाजपा दिल्ली में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार नहीं आने देना चाहती।
मोदी सरकार के इस काम ने कराई किरकिरी
हाल में मोदी सरकार की ओर से दिल्ली सरकार के तहत काम कर रहे एंटी करप्शन ब्यूरो की ताकत कम करने के फैसले का काफी गलत संदेश गया है। जबकि ब्यूरो अदालत में यह लगातार कहता रहा कि वह आप सरकार की ओर से मुकेश अंबानी और वीरप्पा मोइली के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच करने में पूरी तरह सक्षम है।
बहरहाल इन हालातों के बीच भी दिल्ली भाजपा का नेतृत्व लचर बना हुआ है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय का प्रदर्शन कमजोर रहा है। उनका पूरा ध्यान 'आप' विधायकों को तोड़ने में लगा है।
इस बीच, तमाम गलतियों और अंदरुनी झगड़ों के बीच आप का निम्न मध्यवर्गीय और गरीब वोटरों पर प्रभाव बना हुआ है। मुसलमान भी बड़ी तादाद में इसे वोट देने का संकेत दे रहे हैं।
अगर भाजपा जल्द ही इस मसले पर गंभीरता से विचार नहीं करती तो इसका बड़ा नुकसान आने वाले चुनावों में उसे होगा।