दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा कि जनता के समक्ष आम आदमी पार्टी की हताशा अब खुलकर सामने आ गई है। उन्होंने आप नेताओं पर चौतरफा हमला करते हुए आरोपों की झड़ी लगाई।
उन्होंने कहा कि आप नेता अरविंद केजरीवाल मैं, मेरी, मेरा के अहंकार में घिरकर सभी राजनीतिक, संवैधानिक मर्यादाओं को तोड़ते रहते हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले जिस पार्टी ने मतदाताओं के बीच शपथपत्र की प्रतियां बांटी थी कि हम सत्ता में आने पर गाड़ी, बंगला नहीं लेंगे उसके नेता मनीष सिसोदिया ने बुधवार को मीडिया के समक्ष कहा कि बंगला और गाड़ी लेने में हर्ज ही क्या है।
उपाध्याय ने फिर उखाड़े गड़े मुर्दे!
उन्होंने आप नेता व पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती के केंद्र सरकार एवं भाजपा को निर्लज कहे जाने पर कहा कि सरकारी निर्लजता के प्रमाण दिल्ली ने 49 दिनों में इतने देखे कि अब तो उन दिनों को याद करके भी शर्म आती है। सरकारी कोठी को खाली करने में पूर्व मुख्यमंत्री की निर्लजता भी सर्वविदित है।
भाजपा से वीडियो स्टिंग पर जवाब मांगने वाली आम आदमी पार्टी यह तो बताए कि उनकी अपनी पार्टी से जुड़े स्टिंग सामने आए थे तो उन पर उन्होंने क्या कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता अब पूरी तरह समझ गई है कि यह नैतिकता का पाठ सिर्फ जनता को गुमराह करने का खेल है, अपने आचरण के लिए नहीं।
वहीं, उपाध्याय ने शीला दीक्षित के बयान पर कहा कि वह एक जानकार महिला हैं, उन्हें कानून और संविधान की समझ है। उनकी बात को समझना चाहिए।
शीला के मामले में बंटी कांग्रेस
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित द्वारा भाजपा की सरकार बनाने की हिमायत पर कांग्रेस बंट गई है। शीला के ताजा बयान को लेकर पार्टी में घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस ने शीला की राय को उनकी निजी राय बताकर इससे खुद को अलग कर दिया है। जबकि उनके विरोधी उनके खिलाफ सामने आकर सक्रिय हो गए हैं।
दिल्ली के कांग्रेस प्रभारी शकील अहमद ने बाकायदा ट्वीट कर कहा है कि ये दीक्षित की निजी राय है। इससे पार्टी का कोई लेना देना नहीं है। कांग्रेस के मीडिया और संचार विभाग के अध्यक्ष और महासचिव अजय माकन ने भी शीला के बयान को उनका निजी बयान बताया है।
दिल्ली के पूर्व सांसद माकन शीला दीक्षित विरोधी गुट के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं। उनके सामने आकर बयान देने से साफ हो गया है कि शीला की वापसी के बाद दिल्ली की राजनीति गुटों में बंट गई है।
शीला विरोध हैं अरविंदर लवली!
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के कई नेताओं ने शीला दीक्षित के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग सोनिया गांधी से की है। दिल्ली में शीला दीक्षित के नेतृत्व में हार के बाद कांग्रेस ने यूपीए सरकार के आखिरी दिनों में उन्हें केरल भेज दिया गया था। तब उनको दिल्ली की राजनीति से दूर रखने के लिए ये फैसला लिया गया था।
मगर अब जब मोदी सरकार के चलते उन्होंने केरल के राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया है तो उन्होंने दिल्ली की राजनीति में फिर से संकेत होने के संकेत दे दिए हैं।
उनकी वापसी से पार्टी एक बार फिर गुटबाजी में फंस गई है। दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली शीला विरोधी लॉबी के माने जाते हैं। उनको प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पीछे अजय माकन का हाथ माना जाता है।