केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद दिल्ली के अधिकारी हर मामले में गुजरात मॉडल पर जोर दे रहे हैं, लेकिन दक्षिण नगर निगम में सत्तारूढ़ भाजपा के पार्षदों को गुजरात का कूड़ा निस्तारण प्रोजेक्ट पसंद नहीं आए।
इस समस्या से निपटने को मोदी की घोर विरोधी मानी जाने वाली ममता बनर्जी सरकार का प्रोजेक्ट देखने कोलकाता के टूर पर निकले हुए हैं।
भाजपा की सरकार बनने के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल ने पहले गुजरात मॉडल को समझने के लिए भी टीम भेजी थी।
नहीं भाया मोदी का गुजरात मॉडल
दक्षिण दिल्ली नगर निगम के मेयर खुशीराम, स्थायी समिति के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय व सदन के नेता सुभाष आर्य बृहस्पतिवार को कोलकाता नगर निगम के कूड़े से निपटने के प्रोजेक्ट देखने रवाना हो गए।
उनके दौरे का खर्च नगर निगम उठाएगा। जबकि भाजपा पार्षद सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए बड़ोदरा (गुजरात) का मुआयना कर चुके हैं।
बताया जाता है कि उन्हें वहां की व्यवस्था पसंद नहीं आई। इसी कारण उन्होंने कभी भी बड़ोदरा की चर्चा नहीं की।
इस टूर से नाराज क्यों हैं कुछ अधिकारी?
इसी बीच भाजपा के इन वरिष्ठ पार्षदों को जानकारी मिली कि कोलकाता नगर निगम की कूड़े से निपटने की योजना काफी सफल रही है। कोलकाता कूड़ा मुक्त शहर हो चुका है। इसके चलते उन्होंने वहां की व्यवस्था देखने की योजना बनाई।
हालांकि निगम के अधिकारी उनके कोलकाता टूर से खुश नहीं हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोलकाता में कूड़े की समस्या से निपटने के लिए अपनाई जा रही योजना कई वर्ष पहले दिल्ली में लागू कर रखी है।
दिल्ली में कूड़े की समस्या दूर करने के लिए उस योजना का विस्तार करने की आवश्यकता है।
कूड़े दबाने को लगाए कंटेनर
कोलकाता नगर निगम ने कूड़े की समस्या से निपटने को ढलावों की ही व्यवस्था कर रखी है। ढलावों में छोटे-छोटे रिक्शों से कूड़ा लाया जाता है, जिसे वहां कंटेनर में डाला जाता है।
कंटेनर में कूड़े को दबाने की व्यवस्था है। कंटेनर को रात के समय उठाकर सैनेटरी लैंडफिल पर ले जाया जाता है। इसके चलते कूड़ा सड़कों पर बिखरा नहीं रहता और ढलाव भी कूड़ा मुक्त रहते हैं। वहां बदबू भी नहीं आती है।
नगर निगम ने करीब सात वर्ष पहले राजघाट के पास कूड़ा दबाने के लिए कंटेनर लगाए थे। एक कंटेनर में करीब पांच डंपरों का कूड़ा समा जाता है। नगर निगम ने यह योजना सैनेटरी लैंडफिल पर डंपरों का भार करने के साथ-साथ डीजल की बचत करने के लिए अपनाई थी।