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ये है भाजपा की उलझन! वरना बना लेती सरकार

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दिल्ली भाजपा की उलझन बढ़ती जा रही है। पहले तो सिर्फ सरकार बनाने और नहीं बनाने की उलझन थी। लेकिन अब तीन विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव की घोषणा ने भी पार्टी की परेशानी बढ़ा दी है।
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पार्टी को अब यह डर सताने लगा है कि अगर उपचुनाव से पहले अल्पमत की सरकार बन जाती है और पार्टी उपचुनाव में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई तो उसे किरकिरी का सामना करना पड़ेगा।

राजधानी में भाजपा विधायकों की मौजूदा संख्या 29 है वहीं आम आदमी पार्टी के 27 विधायक हैं। ऐसे में अगर दिल्ली में भाजपा की सरकार बन गई और उपचुनाव में प्रदर्शन खराब हुआ तो स्थिति बेहद ही नाजुक हो जाएगी।
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पार्टी को सता रहा है हार का डर

आम आदमी पार्टी तीनों सीट जीत जाती है तो वह सबसे बड़ी पार्टी हो जाएगी। उस स्थिति में विधायकों की संख्या 27 से बढ़कर 30 हो जाएगी। उस सूरत में भाजपा को समर्थन देने वाले विधायक कभी भी पाला बदल सकते हैं। यही वजह है कि भाजपा की बेचैनी बढ़ी हुई है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक अनुकूल परिस्थिति होने के बावजूद भाजपा सरकार बनाने से डरी हुई है। यह स्थिति तब है जब सुप्रीम कोर्ट ने अल्पमत वाली सरकार बनाने की संभावना को देखते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल को इस दिशा में प्रयास करने की बात की है।

राष्ट्रपति ने भी दिल्ली के उपराज्यपाल के उस सुझाव को हरी झंडी दे दी है जिसमें सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा को सरकार बनाने के लिए न्योता देने की बात है।

नहीं होगी मोदी की रैली
पार्टी सूत्रों का कहना है कि तीन सीटों के उपचुनाव में प्रधानमंत्री मोदी एक भी रैली को संबोधित नहीं करेंगे। पार्टी नेता ऐसे में मोदी लहर या जादू का फायदा भाजपा प्रत्याशियों को नहीं मिलने की आशंका जता रहे हैं।
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