नगर निगम और सिटी मजिस्ट्रेट के बीच आवेदनों की जांच में अब जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं अटकेंगे। प्रमाण पत्र के आवेदन पत्र के साथ लोगों को दो पड़ोसियों के एफिडेविट और उनकी आईडी जमा करनी होगी।
नगर निगम जांच के दौरान पड़ोसियों से पूछताछ करेंगे और एफिडेविट सत्य पाए जाने पर प्रमाण पत्र जारी कर देगा। नगर निगम ने लोगों की सहूलियत के लिए यह नई व्यवस्था लागू कर दी है।
दरअसल, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के आवेदनों की जांच को लेकर नगर निगम और जिला प्रशासन आमने-सामने था। नगर निगम के अधिकारी हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए आवेदन पत्रों की जांच कराने की जिम्मेदारी सिटी मजिस्ट्रेट या एसडीएम सदर की बता रहे हैं।
दूसरी ओर, सिटी मजिस्ट्रेट अपने कार्यालय में सिर्फ आवेदनों का रिकार्ड मेंटेन कर जांच की जिम्मेदारी नगर निगम की बता रहे थे। यह विवाद जिलाधिकारी तक भी पहुंचा था।
विवाद के चलते एक हजार से ज्यादा जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे थे। अब नगर निगम ने नई व्यवस्था लागू कर दी है। हालांकि सिटी मजिस्ट्रेट अपने स्तर से भी जांच करा सकेंगे।