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विश्लेषण से हुआ खुलासा: पक्षी बताएंगे दिल्ली की बदलती आबोहवा का मिजाज, जानें- वैज्ञानिक कैसे लगाएंगे पता?

Tue, 22 Mar 2022 02:04 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विशेषज्ञों का कहना है कि अगले तीन-चार साल तक पक्षियों की गणना और इनकी संख्या में होने वाले बदलावों से यह भी पता किया जा सकेगा कि दिल्ली का परिवेश किस तरह बदल रहा है। वैज्ञानिक प्रबंधन के नजरिए से यह बेहद अहम होगा।
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यमुना बॉयोडावर्सिटी पार्क में की गई पक्षियों की गणना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जैव विविधता पार्कों ने दिल्ली के मूल मिजाज को पकड़ लिया है। यहां अरावली श्रृंखला पर मिलने वाली पक्षियां भी बहुतायत मिलती हैं और यमुना नदी के आस-पास मिलने वाली भी। शेष दिल्ली की तुलना में सातों पार्कों में ही 75 फीसदी पक्षियां पाई जाती हैं। बीते महीने पक्षियों की गणना से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण से इसका खुलासा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले तीन-चार साल तक पक्षियों की गणना और इनकी संख्या में होने वाले बदलावों से यह भी पता किया जा सकेगा कि दिल्ली का परिवेश किस तरह बदल रहा है। वैज्ञानिक प्रबंधन के नजरिए से यह बेहद अहम होगा।

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दरअसल, दिल्ली मोटे तौर पर दो भू-दृश्यों में बंटी है। पहला यमुना नदी का क्षेत्र व दूसरा अरावली पर्वत श्रृंखला। बीते 23-26 फरवरी के बीच दिल्ली के सातों बॉयोडावर्सिटी पार्क में पक्षियों की गणना की गई थी। इसके लिए लाइन ट्रांजेक्ट विधि का सहारा लिया गया था। इस दौरान वनों, घास के मैदानों, नम व दलदली भूमियों, नदी क्षेत्र समेत अलग-अलग पर्यावासों में गिनती हुई थी। इससे दिल्ली का पूरा परिवेश गणना के दायरे में आ गया। इसमें हंसराज, दौलत राम व दयाल सिंह कॉलेज की छात्र-छात्राएं, शोधार्थी, वैज्ञानिक व पक्षी प्रेमी शामिल हुए। दिल्ली के सभी सातों पार्कों में 23,907 पक्षी दिखे। यह 159 प्रजातियों व 53 कुल की हैं। इनमें 94 प्रजातियां स्थानीय हैं, जबकि 57 प्रवासी। आठ प्रजातियां समय विशेष की प्रवासी हैं।

दिलचस्प यह कि पूरी दिल्ली में मिलने वाली पक्षियों की तुलना में सातों में इनकी संख्या 60 फीसदी से ऊपर है। मसलन, उत्तरी जिला स्थित यमुना जैव विविधता पार्क और उत्तरी रिज पार्क में फरवरी महीने में 69 फीसदी, दक्षिण पश्चिमी जिले के अरावली व नीला हौज पार्क में 65 फीसदी, दक्षिणी दिल्ली जिले के तुगलकाबाद व तिलपत वैली में 61 फीसदी व पूर्वी दिल्ली के कालिंदी पार्क में 85 फीसदी पक्षियां मिलीं। 
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ऐसे लगेगा पता
यमुना बॉयोडावर्सिटी पार्क के इंचार्ज फैयाज खुदसर ने बताया कि वैश्विक फोरम ई-बर्ड के आंकड़ों के सहारे पक्षियों की संख्या पता की गई है। यह बड़ा दिलचस्प है कि दिल्ली में मिलने वाली कुल पक्षियों का 75 फीसदी पार्कों में दिखी हैं। यह दोनों भूदृश्यों की हैं। दूसरी बात यह कि पक्षियों से शहर विशेष का परिवेश आसानी से पता चल जाता है। इससे जलवायु में होने वाले बदलावों को भी मापा जा सकता है। बॉयोडावर्सिटी पार्क ने इसी मकसद को लेकर पक्षियों की गणना शुरू की है। अभी यह पहला अनुभव है। अगले तीन-चार साल की गणना के बाद हमारे पास एक डाटा बैंक बन जाएगा।

इस तरह पता चलेगा मिजाज
फैयाज खुदसर बताते हैं कि यह वक्त पक्षियों के प्रजनन का है। इसके लिए उनको जमीनी स्तर पर वनस्पतियां चाहिए। लेकिन देर तक बारिश होने और ठंड ज्यादा पड़ने से वनस्पतियां अभी तक ठीक से नहीं उगी हैं। इससे पक्षियों के प्रजनन पर असर पड़ेगा। तीन-चार साल के आंकड़े मिलने के बाद मौसम में होने वाले बदलावों व उसके हिसाब से इसका प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। जलवायु के बार-बार एक ही तरह होने से वनस्पतियों की प्रजातियों में भी बदलाव करना पड़ सकता है। पक्षियों की संख्या घटने-बढ़ने से इनके पर्यावास की गुणवत्ता व जलवायु परिवर्तन के असर को पता करने में सहूलियत रहेगी। 

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