बर्ड फ्लू फैलने पर पक्षियों को दफनाने की एक प्रक्रिया है। इसके तहत पशुपालन विभाग का स्टाफ पीपीई किट पहनकर मृत पक्षियों का उठाता है। फिर उसे पॉलीथीन में पैक करके तीन से चार फिट गहर गड्ढे में दफना दिया जाता है। गड्ढे में पहले से ही चूना पड़ा रहता है। चिकित्सकों का कहना है कि इसके बाद मृत पक्षियों से संक्रमण होने का खतरा नहीं रह जाता। वहीं, पीपीई किट पहने विभागीय स्टाफ भी संक्रमित नहीं होता।
उप-राज्यपाल ने दिया सख्ती का निर्देश
बर्ड फ्लू के मामले मिलने के बाद दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारी सख्ती से नियमों का पालन करें। केंद्र सरकार की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों के तहत जरूरी कार्रवाई करें। दूसरी तरफ आम लोगों को भी इस दौरान एहतियात बरतने की सलाह उप-राज्यपाल ने दी है। उनका कहना है कि अगर कहीं कोई दिक्कत होती है तो हेल्पलाइन नंबर 011-23890318 पर फोन करके मदद ले सकते हैं।
दिल्ली में बर्ड फ्लू की भी पुष्टि हो गई है। डॉक्टरों का कहना है कि जो लोग पक्षी पालन से जुड़े हैं। उन्हें सावधानी बरतने की जरूरत है। क्योकि यह वायरस लोगों में भी फैल सकता है।
इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर के डॉक्टर विजय दत्ता ने बताया कि जिन मृत पक्षियों में यह वायरस पाया गया है। उनके सीधे संपर्क में आने वाले व्यक्तियों के भी इससे संक्रमित होने की संभावना है। हालांकि, बर्ड फ्लू का एच-5एन-1 स्ट्रेन की लोगों में फैलता है, लेकिन सभी को पूरी सावधानी बरतनी होगी खासकर पक्षी पालन से जुड़े लोगों को पक्षियों के संपर्क में आने से बचना होगा।
डॉक्टर के मुताबिक, बर्ड फ्लू का यह स्ट्रेन काफी घातक है। इसका पहला मामला 1997 में आया था। इस वायरस से पीड़ित होने के बाद 60 फीसदी तक जान का खतरा रहता है। इसलिए, इस समय पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है। पक्षी पालन से जुड़े लोगों को पोल्ट्री फार्म में जाने से पहले पीपीई किट पहननी जरूरी है। अगर किसी संक्रमित पक्षी के संपर्क में आए हैं और खांसी बुखार या सांस लेने में तकलीफ होने की समस्या हो रही है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।