बीजेपी बेहद तेजी से अन्य पार्टियों के से निकाले या रूठे हुए नेताओं को अपने दल में शामिल कर रही है। यहीं नहीं उन्हें अच्छी सीटों का टिकट भी दिया जा रहा है। पर क्या वजह है कि बीजेपी के करीबी होते हुए बिन्नी को पार्टी में शामिल नहीं किया गया।
कहते हैं जब दोस्त दूश्मन बनता है तो अधिक घातक साबित होता है। क्योंकि उसे आपकी कमजोरियां अच्छे से मालूम होती हैं। हालांकि राजनीति में रोजाना दोस्ती-दुश्मनी की नई परिभाषाएं गढ़ी जाती हैं। लेकिन विनोद कुमार बिन्नी ने जिस तरह से अरविंद केजरीवाल को हराने का दावा कर दिया है और उनके खिलाफ चुनाव लड़ने जा रहे हैं, आप इसे कुछ और ही समझ रही है।
कभी आप के प्रमुख नेता रह चुके विनोद कुमार बिन्नी ने केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसलिए उन्होंने बनारस से चुनाव लड़ने की ठान ली है। हालांकि भाजपा में रहते हुए दिल्ली में पार्षद रह चुके लक्ष्मी नगर के विधायक के इस कदम को आप एक चाल की तरह देख रही है।