नोएडा में बिजली के बड़े उपभोक्ताओं को मशीन से बिल मिलेगा। मीटर रीडिंग इंस्ट्रुमेंट (एमआरआई) की सहायता से बिजली उपभोग का आंकड़ा संबंधित डिवीजन कार्यालय में पहुंच जाएगा।
जिसके बाद मीटर रीडिंग में होने वाली छेड़छाड़ काफी मुश्किल होगी। इस व्यवस्था को दस किलोवाट से अधिक के उपभोक्ताओं पर लागू कर दिया गया है।
विभाग ने बिजली चोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। नियामक आयोग के निर्देशानुसार 2013-14 में टैरिफ आर्डर के तहत 10 किलोवाट(केवी) से ऊपर के उपभोक्ताओं की मीटर रीडिंग में एमआरआई लगाने का काम किया जा रहा है।
पश्चिमांचल विद्युत निगम के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर अरविंद राजवेदी ने बताया कि अभी तक यह व्यवस्था 25 किलोवाट से ऊपर के उपभोक्ताओं पर लागू थी, लेकिन अब इसे दस किलोवाट वाले उपभोक्ताओं पर लागू किया गया है।
इसमें मीटर की रीडिंग सीधे डिवीजन कार्यालय के कंप्यूटर में दर्ज हो जाएगी, जिसके बाद इसमें छेड़छाड़ नहीं हो सकेगी। कई बार शिकायतें मिली हैं कि मीटर रीडिंग करने वाली एजेंसी गलत बिल तैयार कर देती है, जिससे दिक्कत आती है।
नई व्यवस्था के बाद डिवीजन से बिलों को उपभोक्ताओं के पास भेज दिया जाएगा। इसके अलावा विभाग ने सभी बड़े उपभोक्ताओं को बिजली बचाने के लिए उच्च तकनीक के कैपेसिटर लगाने की सिफारिश की है।