चुनाव आयोग की सख्ती बढ़ी तो लोकसभा चुनाव 2014 में प्रचार का तरीका भी बदल गया। नेता बड़ी जनसभाओं पर पैसा बहाने के बजाय सोशल मीडिया व नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से प्रचार को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
बड़ी रैली केवल राष्ट्रीय स्तर के नेता के आने पर ही हो रही है। आयोग ने चुनाव प्रचार के खर्च की सीमा 70 लाख रुपये तय कर दी है। इस राशि को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दल सीमित खर्च में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जिसमें सोशल मीडिया सबसे बड़ा हथियार बन रहा है।
सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने अपनी उपलब्धियां फेसबुक पेज पर डाल दी है। इसके अलावा रोजाना का जनसंपर्क अभियान भी फेसबुक पर अपडेट किया जा रहा है ताकि लोगों को इसकी जानकारी से अवगत कराया जा सके।
फेसबुक के जरिए वोट देने की अपील
कांग्रेस प्रत्याशी अवतार सिंह भड़ाना ने अपने फेसबुक पेज पर पिछले दस सालों में किए गए विकास कार्यों के बारे में बताया है। भड़ाना लोगों से फेसबुक के माध्यम से वोट देने की अपील कर रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी कृष्णपाल गुर्जर के फेसबुक पेज में मोदी लहर को दिखाने की कोशिश की है। भाजपा का गीत अपलोड करके लोगों से उसे शेयर करने की अपील कर रहे हैं। जबकि इनेलो प्रत्याशी आर के आंनद फेसबुक पर अपने जनसंपर्क अभियान को अपडेट कर लोगों से वोट देने की अपील कर रहे हैं।
नुक्कड़ सभा व डोर टू डोर संपर्क पर अधिक जोर
प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार का काम अपने समर्थकों में बांट दिया है। प्रत्याशियों के मुताबिक, मतदान की तारीख तक पूरे लोकसभा क्षेत्र में सभा कर पाना मुश्किल है। ऐसे में उन्होंने वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को नुक्कड़ सभाएं करने की जिम्मेदारी सौंपी है, जिससे लोगों को पार्टी की नीतियों से अवगत कराया जा सके। इसके अलावा सभी दलों ने अपनी टीशर्ट भी बनवा ली है। जिन्हें पहनकर कार्यकर्ता पार्टी के प्रचार में लगे हुए हैं।
हुक्के के बहाने बुजुर्गों को रिझाने का प्रयास
बुजुर्ग लोगों को हुक्का पीने के बहाने अपनी पार्टी के साथ जोड़ने का प्रयास हर प्रत्याशी की ओर से किया जा रहा है। सभी दलों के कार्यालय में हुक्का रखा हुआ है, जहां पर बुजुर्ग लोगों को हुक्का पीने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। इसके बहाने उन्हें अपनी पार्टी की गतिविधियों से अवगत कराया जा रहा है ताकि उनके माध्यम से युवा भी पार्टी में शामिल किया जा सके।