नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की मुख्य पीठ के आदेश पर शहर की भूषण स्टील चार संस्थानों को चार सप्ताह के लिए बंद होंगी। सामाजिक कार्यकर्ता शैलेंद्र चौहान की याचिका पर बृहस्पतिवार को एनजीटी की चार सदस्यीय पूर्ण पीठ ने इसका आदेश दिया।
आदेश डार्क जोन में बिना अनुमति के साढ़े 24 लाख लीटर भूजल दोहन रोजाना करने केचलते दिया गया। कंपनी प्रबंधन ने बंद करने के आदेश मिलने से इंकार किया है।
भूषण स्टील की तीन बड़ी इकाइयों में एक साहिबाबाद में है। इसमें 1200 मीट्रिक टन उत्पादन क्षमता वाली कंपनी में 2500 से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता शैलेश चौहान ने अक्तूबर में एनजीटी में भूषण स्टील के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। इसमें आरोप लगाया था कि भूषण स्टील में रोजाना करीब साढ़े 24 लाख लीटर जल दोहन हो रहा है।
यही आरोप मून बेवरेज, शिवा स्कूटर एजेंसी और मोटर क्राफ्ट पर भी लगे थे। इसके पास भूजल दोहन का लाइसेंस नहीं है।
एनजीटी केआदेश पर जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण और श्रम विभाग की संयुक्त टीम ने चार सितंबर को इनका औचक निरीक्षण किया था। टीम ने अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी थी।
बृहस्पतिवार को एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस स्वतंत्र कुमार, एमएस नेंबियार, डीके अग्रवाल और बिक्रम सिंह सजवान की बेंच ने भूषण स्टील, वाटर पैकिंग की कंपनी मून बेवरेज (कोका कोला), शिवा स्कूटर एजेंसी और मोटर क्राफ्ट मारूति सुजूकी सर्विस स्टेशन को चार सप्ताह केलिए बंद कराने के आदेश दिए हैं।
इस दौरान कंपनी को केंद्रीय भूजल अथारटी से सर्टीफिकेट लेना होगा। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों की टीम को कंपनी का निरीक्षण भी करना होगा।