केजरीवाल को प्रशांत भूषण की तरफ लिखे खुले पत्र में गुडबाय शब्द को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। गुडबाय से अंदाजा लगाया जा रहा था कि प्रशांत भूषण ने पार्टी को गुडबाय कह दिया है।
मगर शनिवार को पार्टी छोड़ने के अटकलों को उन्होंने खुद विराम लगा दिया। उन्होंने कहा कि गुडबाय का मतलब पार्टी छोड़ने से नहीं था।
वह अब केजरीवाल के साथ काम नहीं कर सकते है इसलिए उन्हें गुडबाय कहा है। वह अभी भी पार्टी में है। वह रहेंगे या नहीं इसका फैसला आने वाले दिनों में लिया जाएगा।
गुडलक शब्द ने ही मचा दिया बवाल
दरअसल, शुक्रवार को भूषण ने केजरीवाल को एक चिट्ठी लिखी। बीते कुछ दिनों में पार्टी के अंदर हुई दो फाड़ और उसपर केजरीवाल के रवैए को लेकर प्रशांत भूषण ने उन्हें तानाशाह करार दिया था।
उन्होंने केजरीवाल पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने अभी तक उनका सबसे खराब रूप देखा है। भूषण ने उनकी तुलना तानाशाह स्टालिन से कर डाली थी।
पत्र के अंत में गुडबाय व गुडलक शब्द का इस्तेमाल किया था। जिसके बाद अंदाजा लगाय जा रहा था कि प्रशांत भूषण ने पार्टी छोड़ दी है।
गुडबाय का मतलब साथ छोड़ना है पार्टी नहीं
शनिवार को इस चर्चा पर उस समय विराम लग गया जब प्रशांत भूषण ने कहा कि गुडबाय का मतलब केजरीवाल का साथ छोड़ना है पार्टी का नहीं।
वह 14 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद इसपर फैसला लेंगे। यही नहीं उन्होंने कहा है कि वह 14 अप्रैल की बैठक में ही तय करेंगे की वह पार्टी छोड़ दे या पार्टी को कैद से छुड़ाएं।
उनका इशारा केजरीवाल व उनके गुट की तरफ था। बताते चले कि भूषण ने योगेंद्र यादव ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकाले जाने के बाद 14 अप्रैल को दिल्ली में एक बैठक कर रहे है। इसमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों को बुलाया गया है।