वहीं वर्ष 1998 में निर्दलीय के तौर पर लड़े रामसिंह नेताजी ने कांग्रेस के रामवीर बिधूड़ी को हराया, जबकि वर्ष 2003 में कांग्रेस के रामसिंह नेताजी को एनसीपी के रामवीर बिधूड़ी ने हरा दिया। वर्ष 2008 में बसपा के रामसिंह बिधूड़ी ने कांग्रेस के रामवीर बिधूड़ी को हराया। इन चारों में भाजपा तीसरे स्थान पर रही थी। इस तरह इन चार चुनाव में इस क्षेत्र में कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा काे भी जीत नसीब नहीं हुई थी।
बदरपुर क्षेत्र में वर्ष 2013 में भाजपा का खाता खुल गया और भाजपा के रामवीर बिधड़ी ने कांग्रेस के रामसिंह नेताजी को हरा दिया, मगर वर्ष 2015 में आम आदमी पार्टी के नारायण दत्त शर्मा ने भाजपा के रामवीर बिधड़ी और कांग्रेस के रामसिंह नेताजी को हराया। वर्ष 2000 में भाजपा के रामवीर बिधड़ी ने आम आदमी पार्टी के रामसिंह नेताजी को हरा दिया। इस चुनाव में कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही थी।
बदरपुर क्षेत्र के बाद राहुल गांधी की यात्रा ओखला, तुगलकाबाद, जंगपुरा, नई दिल्ली, मटिया महल व चांदनी चौक क्षेत्र से गुजरेगी। इन क्षेत्रों में कांग्रेस एक से तीन-चार बार विधानसभा चुनाव जीत चुकी है।
यात्रा के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की विदाई संभव
भारत जोड़ो यात्रा के बाद दिल्ली कांग्रेस में बदलाव की तैयारी है। निगम चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन को देखते हुए माना जा रहा है कि नए साल में नये चेहरे को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सौंपी जा सकती है। यात्रा के दिल्ली से रवाना होने से पहले ही इसपर फैसला लिए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। निगम चुनाव में कांग्रेस के तमाम दावों और कोशिशों के बावजूद पार्टी को 250 में से महज नौ सीटों पर जीत मिली।
चुनाव में पार्टी ने मेरी चमकती दिल्ली का नारा दिया। लेकिन पार्टी के इस प्रदर्शन से चमक और कम हो गई। ऐसे में प्रदेश की कमान पर उठे सवाल का जवाब भी जल्द मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रदेश कांग्रेस में पार्टी के नेता चुनाव के प्रदर्शन को अच्छा मानते हुए यह कहते रहे कि विधानसभा चुनाव से वोट प्रतिशतता बढ़ी है। हालांकि परिणाम पर विपरीत असर पड़ा है।