शहीद-ए-आजम भगत सिंह की यादें इस औद्योगिक शहर से बहुत गहरे जुड़ी हुई हैं। भगत सिंह की जेल डायरी और उनकी माता विद्यावती की कार को आज भी शहर ने संजोया हुआ है।
जिन्हें देखकर इस महान क्रांतिकारी और उन्हें जन्म देने वाली उनसे भी महान मां की यादें ताजा हो जाती हैं। साठ के दशक में भगत सिंह के छोटे भाई सरदार कुलबीर सिंह पंजाब के फिरोजपुर जिले से फरीदाबाद आ गए थे। साथ में उनकी मां विद्यावती भी थीं। वह लंबे समय तक यहां रही थीं।
शहीद-ए-आजम के पौत्र यादवेंद्र सिंह संधू बताते हैं कि 01 जनवरी 1973 को चंडीगढ़ में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्ञानीजैल सिंह ने उन्हें पंजाब माता का खिताब देते हुए अंबेसडर कार दी थी।
यह कार इस समय एनएच-तीन स्थित भगत सिंह कॉलेज में सुरक्षित है। इसका नंबर पीयूआर-2198 है। ऊपर पंजाब माता लिखा हुआ है। वह शहर में इसी से आया-जाया करती थीं। हालांकि अब यह कार चलती नहीं है।
404 पेज की है डायरी
भगत सिंह की मूल जेल डायरी भी इस शहर का हिस्सा है। लाहौर सेंट्रल जेल प्रशासन ने उन्हें लिखने के लिए एक डायरी 12 सितंबर 1929 को दी थी। शहीद-ए-आजम ने इसमें अंग्रेजी और उर्दू में लिखा है। इसके हर पन्ने पर वतनपरस्ती झलकती है।
आजादी के सपने लेकर भगत सिंह ने लाहौर जेल में जो कठिन दिन गुजारे, उसका हर लम्हा 404 पेज की इस डायरी में कैद है। सिर्फ 23 साल की जिंदगी जीने वाले भगत सिंह की यह जेल डायरी उनके पूरे व्यक्तित्व को समझाने के लिए काफी है।
इसे देखने पर पता चलता है कि वह अर्थशास्त्र की भी अच्छी समझ रखते थे। इसमें उन्होंने स्वछंदवाद के हिमायती मशहूर अमेरिकी लेखक जेम्स रसेल लावेल की आजादी के बारे में लिखी गई कविता ‘फ्रीडम’ भी लिखी है।
ऐसे रखा गया था भगत सिंह नाम
यह एक संयोग ही है कि 28 सितंबर 1907 को भगत सिंह के जन्म पर उनके पिता किशन सिंह और चाचा अजीत सिंह जेल से रिहा हुए थे। दोनों स्वतंत्रता सेनानी थे। तभी उनकी दादी जयकौर के मुंह से निकला कि ऐ मुंडा तो बड़ा भाग वाला है। तभी परिवार के लोगों ने फैसला किया कि भागा वाला होने की वजह से लड़के का नाम इन्हीं शब्दों से मिलते-जुलते होना चाहिए, लिहाजा उनका नाम भगत सिंह रख दिया गया।
अब हिंदी और मराठी में भी आएगी जेल डायरी
हरियाणा सरकार ने शहीद-ए-आजम की जेल डायरी को हिंदी में छपवाने का आश्वासन यादवेंद्र सिंह संधू को दिया था, लेकिन कई बार आग्रह के बाद भी ऐसा नहीं हुआ। फिर संधू ने खुद अंग्रेजी में इसे छपवाया। जिसमें एक तरफ मूल डायरी की फोटोकॉपी और सामने दूसरे पेज पर उसका अंग्रेजी रूप लिखा है। अब इसे हिंदी और मराठी में भी छपवाने की तैयारी है।