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सट्टा किंग हाजी मस्तान गिरफ्तार, मकोका लगा था

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उत्तर-पश्चिम जिला पुलिस ने सट्टा किंग व डॉन हाजी मस्तान उर्फ हाजी उस्मान समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की मानें तो हाजी पूरे उत्तर भारत में सट्टे का बड़ा कारोबार चला रहा था।
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एक विशेष तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल सट्टा चलाने के लिए किया जा रहा था। आरोपियों की पहचान मोहम्मद उस्मान उर्फ हाजी मस्तान उर्फ हाजी, सुभाष चंदर वर्मा, शमशाद खान और रविंदर के रूप में हुई है।

पुलिस को मकोका के मामले में हाजी की तलाश थी। इससे पूर्व वह 50 से अधिक सट्टे के मामलों में शामिल रह चुका है। वहीं पिछले 40 साल से वह चांदनी महल थाने का बीसी भी है। पुलिस ने करीब एक लाख रुपये, तीन लैपटॉप, आठ मोबाइल और सट्टे में इस्तेमाल किया जाने वाला अन्य सामान बरामद किया है।
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सट्टे का अड्डा बढ़िया तकनीक से लैस था

उत्तर-पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त विजय सिंह ने बताया कि 13 फरवरी को उनकी टीम को सूचना मिली थी कि ईई-2691, दूसरी मंजिल, जहांगीरपुरी के मकान में सट्टा लगाया जा रहा है।

सूचना के बाद पुलिस ने मकान पर छापा मारकर वहां से सुभाष, रविंदर और शमशाद खान को गिरफ्तार कर लिया। सुभाष रुपये गिन रहा था, वहीं शमशाद सॉफ्टवेयर के जरिये सट्टे की एंट्री कर रहा था।

रविंदर जंत्री (रुपयों का चार्ट) तैयार कर रहा था। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि सट्टे का अड्डा बढ़िया तकनीक से लैस था। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह हाजी मस्तान के लिए काम करते हैं।

उत्तर भारत में सैकड़ों जगह उसके सट्टे के अड्डे चल रहे हैं

हाजी मस्तान कूचा चालान, चांदनी महल इलाके में कहीं रहता है। छानबीन के बाद पुलिस ने उसे चांदनी महल इलाके से दबोच लिया। आरोपी ने बताया कि वह धोखाधड़ी के मामले में गोकलपुरी थाने से भगोड़ा घोषित है।

उत्तर भारत में सैकड़ों जगह उसके सट्टे के अड्डे चल रहे हैं। दिल्ली से ही वह सभी अड्डों का संचालन करता है। सट्टे के अड्डे चलाने वाले अपने गैंग के सदस्यों को वह मोटा कमीशन व सुरक्षा देता है।

उपायुक्त के मुताबिक, हाजी मस्तान दिल्ली का पुराना सट्टा किंग रहे इनायत अली का बेटा है। पुलिस हाजी मस्तान से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
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ऐसे चलता था सट्टे का खेल

हाजी के पूरे सट्टा रैकेट को कंपनी के नाम से जाना जाता है। पूरे उत्तर भारत के हर शहर में छोटी-छोटी जगह पर हाजी ने खैयवाल (छोटे सट्टा संचालक) तैनात किए हुए हैं। खैयवाल को एक विशेष तरह का सॉफ्टवेयर दिया गया है।

सट्टा लगाने वाले लोग नंबरों पर सट्टा लगाते हैं। एक से दस नंबर पर सट्टा लगाने के लिए विशेष शब्द हरुफ का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं 10 से 100 नंबर के लिए धड़ा शब्द का इस्तेमाल किया जाता था।

खैयवाल हरुफ या धड़ा बुक करते हैं। हरुफ के लिए एक का दस, वहीं धड़े के लिए एक का अस्सी दिया जाता है। दिन में चार से पांच बार सट्टा खोला जाता है। अलग-अलग समय के लिए सट्टे को अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

गली सुबह 9.30 बजे, दिसावर सुबह 6.00 बजे, ताज दोपहर 2.30 बजे, फरीदाबाद रात 12.30 बजे और न्यू गली शाम 6.00 बजे खोला जाता है। विशेष सॉफ्टवेयर के जरिये जिन नंबरों पर सबसे कम सट्टा लगा होता है उनको खोला जाता है, जिससे ज्यादा से ज्यादा मुनाफा होता है। सट्टे का नंबर खैयवालों पर एसएमएस या ऑनलाइन आ जाता है। खैयवालों को कुल रुपयों का 10 फीसदी मुनाफा दे दिया जाता है।
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