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Delhi : अदालत ने कहा- मुकदमा चलाने से पहले बैंक सुनिश्चित करें कर्ज लेने वाला जीवित भी है या नहीं

Fri, 17 Nov 2023 06:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

इस टिप्पणी के साथ दिल्ली की एक अदालत ने ऋण चूककर्ता के खिलाफ वसूली के मुकदमे को खारिज करते हुए यह निर्देश दिया। दरअसल ऋण लेने वाले की मृत्यु हो चुकी है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोई भी बैंक विशेष रूप से भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) देश का अग्रणी बैंक होने के नाते यह सुनिश्चित करे कि जिन लोगों पर मुकदमा चल रहा है वे मृत हैं या जीवित हैं। इस टिप्पणी के साथ दिल्ली की एक अदालत ने ऋण चूककर्ता के खिलाफ वसूली के मुकदमे को खारिज करते हुए यह निर्देश दिया। दरअसल ऋण लेने वाले की मृत्यु हो चुकी है।

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जिला जज सुरिंदर एस राठी, सिया नंद नामक व्यक्ति के खिलाफ ब्याज समेत लगभग 13.51 लाख रुपये की वसूली के लिए एसबीआई की ओर से दायर मुकदमे पर सुनवाई कर रहे थे। अदालत ने पहले बैंक को प्रतिवादी के बारे में जांच करने के लिए कहा था, जिसके बाद यह सामने आया कि मुकदमा दायर करने से दो साल पहले नंद की मृत्यु हो गई थी।

दालत ने इसके बाद गलत हलफनामा देने के लिए संबंधित शाखा प्रबंधक और महाप्रबंधक (कानून, वसूली और मुकदमेबाजी) को नोटिस जारी किया ताकि यह बताया जा सके कि बैंक ने एक मृत व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा करने का फैसला क्यों किया। अदालत ने आदेश में कहा, इसके जवाब में एसबीआई ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और अदालत को आश्वासन दिया है कि वे इस संबंध में मौजूदा आंतरिक परिपत्र का अनुपालन न करने के लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई कर रहे हैं। 
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अभी एसओपी में ऐसा कोई नियम नहीं
अदालत ने कहा, बैंक की मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) में ऐसा कुछ भी नहीं दिया गया है कि कैसे पता लगाया जाए कि जिस प्रतिवादी पर मुकदमा चलाने की मांग की गई है वह मृत है या जीवित है। अदालत ने नोट किया कि एसबीआई ने अदालत के सुझाव को स्वीकार कर लिया था कि उसके मुकदमेबाजी अधिकारी जन्म और मृत्यु के मुख्य रजिस्ट्रार के डाटाबेस तक पहुंच प्राप्त करेंगे।

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