दिल्ली के वसंत विहार गैंगरेप के बाद देशभर में जनता के गुस्से और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए उम्मीद जगी थी कि अब बेटियां सुरक्षित रहेंगी। लेकिन एक साल बाद ही बीएड की छात्रा को अपनी पढ़ाई इसलिए छोड़नी पड़ी, क्योंकि एक अमीर और बिगडै़ल ने शादी न करने पर चेहरे पर तेजाब डालने की धमकी दे दी।
यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट जयपुर के कुलपति प्रो. सत्यजीत चक्रवर्ती की आंखें बिटिया के दर्द को बताते हुए नम हो उठीं। दिल्ली प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रो. चक्रवर्ती ने कहा कि हमारे एक प्रो. की बेटी पश्चिम बंगाल स्थित रविंद्र भारतीय यूनिवर्सिटी में बीएड की छात्रा थी।
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कॉलेज में एक अमीर बिगडै़ल ने शादी न करने पर चेहरे पर तेजाब डालने की धमकी दी। मैंने पश्चिम बंगाल के डीजीपी से मिलकर सारी जानकारी दी। डीजीपी ने कार्रवाई और सुरक्षा करने की बजाय हमें समझाया कि उसका कुछ नहीं बिगडे़गा, क्योंकि उसकी अगले दिन ही जमानत हो जाएगी।
बेटी को हमने शहर से बाहर गुप्त जगह पर भेज दिया, क्योंकि हमारे कानून में कई खामियां अब भी हैं। इसी मुद्दे के चलते हम देश में आईपीसी और सीआरपीसी की धारा में बदलाव करने व कनाडा की तर्ज पर ‘निरोधक कानून’ लागू करने की मांग कर रहे हैं।
प्रो. चक्रवर्ती के मुताबिक, शिक्षित वर्ग समाजसेवी अन्ना हजारे या मेधा पाटेकर की तरह आंदोलन नहीं कर सकता। हां, अगर देश के एनजीओ, युवा और एक्टिविस्ट कानून में सुधार के लिए आवाज बुलंद करें तो ये परेशानी हल हो सकती है।
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इसी विषय को लेकर आईआईसी में मंगलवार को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, मुंबई हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश छित्तोतोष मुखर्जी, विधायक सुजीत बोस, मध्यप्रदेश से दस्तीदार डा. ककोली घोष, आईपीएस पीसी मुरलीधर, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता चर्चा करेंगे।
इसके बाद यूईएम की ओर से राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, भारत की कानून समिति के चेयरपर्सन को पत्र लिखकर सुधार की दिशा में गुहार करेंगे।