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नोएडा बन रहा है आतंक की पनाहगाह

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एनसीआर में बांग्लादेशी अपराधियों का नेटवर्क बढ़ता जा रहा है। इनका सबसे सुरक्षित ठिकाना नोएडा बनता जा रहा है। शहर के सीमावर्ती क्षेत्रों, झुग्गी झोपड़ियों में इन्होंने पनाह ले रखी है।
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बाहरी ताकतों से इनको मदद भी मिलती है। गत कुछ सालों में यहां दो दर्जन से ज्यादा बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन अब भी सैकड़ों बांग्लादेशी यहां नाम बदलकर रह रहें हैं।

कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश की सीमा पर पकड़े गए संदिग्ध आतंकी के पास से मिले लैपटॉप की जानकारी के तहत इनके तार नोएडा से जुड़े मिले हैं। इनके अधिकांश ठिकाने दिल्ली व आसपास के इलाके हैं।
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वारदात के बाद बदल जाता है ठिकाना

ये लोग वारदात के बाद आसानी से ठिकाना बदल लेते हैं। शहर में सेक्टर-15 की झुग्गी, सेक्टर-8 झुग्गी, निठारी, सेक्टर-11 इंडस्ट्रियल सेक्टर की झुग्गी व दूरदराज गांवों में इन्होंने अपना बसेरा बना रखा है।

गौरतलब है कि 2012 में नोएडा पुलिस ने बांग्लादेशी महिला रहिना को पूरे परिवार के साथ गिरफ्तार किया था। वह गत 19 सालों से नोएडा में परिवार के साथ रह रही थी।

इसके अलावा भी कई और बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया गया है। हाल में लोकल इंटेलिजेंस यूनिट व पुलिस ने संयुक्त रूप से सत्यापन का अभियान चलाया। इसमें कई संदिग्धों का पता चला।

नोएडा से गिरफ्तार बांग्लादेशी

2014 में थाना-49 पुलिस ने काजल शेख को गिरफ्तार किया। काजल शेख कबाड़ी का धंधा कर रहा था। यह बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल आया। जहां इसके खिलाफ हत्या के कई मामले दर्ज थे। 2012 को रहिना को कयूम शेख, स्माइल व मो. राजू के साथ गिरफ्तार किया गया। रहिना बांग्लादेशी है। वह भी पश्चिम बंगाल पहुंची। इसके बाद छत्तीसगढ़ में उसने शादी की और नोएडा में रह रही थी। उसने नोएडा का वोटर कार्ड भी बनवाया था। चेकिंग के दौरान उसे पकड़ा गया।

2010 में थाना-58 पुलिस ने मो.बाबू, मो. सुमन, मो. सुजान को गिरफ्तार किया। इन तीनों ने मेंटल ग्रुप बनाया था। जिन्होंने दिल्ली एनसीआर में कई बड़ी वारदातों को अंजाम दिया। ये सभी बांग्लादेशी थे। 2008  में तौफीक अब्दुल्ला को मोरना से एटीएस और तमिलनाडु पुलिस ने गिरफ्तार किया। यह बांग्लादेश से भागकर तमिलनाडु पहुंचा और वहां से नोएडा।

जनवरी 2009 में एटीएस ने एनकाउंटर में दो आतंकियों को मार गिराया था। फारूक मोहम्मद और अबू इस्माइल नामक आतंकी दिल्ली एनसीआर में गणतंत्र दिवस के मौके पर बड़ी वारदात को अंजाम देने आए थे।

नोएडा पुलिस की चुप्पी भी सवालों के घेरे में

यूपी एटीएस की टीम की पोल उस वक्त खुल गई जब संदिग्ध आतंकी को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और किसी को कानो-कान खबर तक नहीं हुई। गिरफ्तार बांग्लादेशी अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए नोएडा में ठिकाना बना कर दिल्ली व पश्चिमी उत्तर प्रदेश की रेकी कर रहा था। नोएडा पुलिस की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है।

बताया जाता है कि जिन दो संदिग्ध आतंकियों, बरकतउल्ला और सहारनपुर निवासी अब्दुल अजीज, को पश्चिम बंगाल के 24 नॉर्थ परगना पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उनकी भूमिका संदेह के घेरे में है। 2 अक्टूबर 2014 में हुए बर्धवान धमाके को अंजाम देने वाले जेएमबी (जमात उल मुजाहिद्दीन बांग्लादेश) के  आतंकी सैदुर रहमान और अबुल सालेक से इनके संबंध हैं।

सूत्र बताते हैं कि यह दोनों काफी दिनों से सक्रिय थे और पश्चिम बंगाल पुलिस इनकी मानीटरिंग कर रही थी। नोएडा में इनकी उपस्थिति और गतिविधि के बारे में नोएडा पुलिस व एटीएस को भनक तक नहीं लगी। दोनों पश्चिम बंगाल पुलिस की रडार पर थे। नोएडा पुलिस व एटीएस को इनकी गिरफ्तारी का तब पता चला जब पश्चिम बंगाल पुलिस अपना काम कर चुकी थी। बाकायदा ट्रांजिट रिमांड ले कर पश्चिम बंगाल पुलिस संदिग्ध आतंकियों को अपने साथ पश्चिम बंगाल ले गई और एटीएस व पुलिस हाथ मलती रह गई।

ज्यादा संवेदनशील है नोएडा

राजधानी से सटे होने के कारण नोएडा सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण संवेदनशील माना जाता है। 26 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

इसलिए एटीएस की टीम ने नोएडा को अपना ठिकाना बना रखा है, जिससे दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर भी उनकी नजर रहे। ऐसे में नोएडा पुलिस अपनी पीठ थपथपाने के लिए रोजाना मॉल-बाजार आदि जगहों पर एटीएस के साथ मॉक ड्रिल कर रही। लेकिन इतनी बड़ी घटना की भनक तक नहीं लगने पर नोएडा पुलिस की चौकसी पर सवाल उठना तो लाजमी है।

एलआईयू भी फेल
जिला पुलिस की महत्वूर्ण विंग एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) होती है, जो जिले में सभी गतिविधियों पर नजर रखती है। एलआईयू अपनी रोजाना रिपोर्ट एसएसपी को सौंपती है। ऐेसे में शहर में संदिग्ध आतंकियों की गतिविधि का होना एलआईयू की कार्यक्षमता पर सवाल खड़ा करता है। अगर पश्चिम बंगाल की पुलिस सजग न होती तो कुछ भी अनहोनी घट सकती थी।
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माहौल बिगाड़ना चाहते थे संदिग्ध आतंकी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का माहौल बिगाड़ना चाहते थे पश्चिम बंगाल और नोएडा में पकड़े गए दो बांग्लादेशी संदिग्ध आतंकी। 17 दिसंबर को पश्चिम बंगाल से पकड़े गए बरकतउल्ला के लैपटॉप में 26-11 मुंबई और गुजरात दंगों के वीडियो थे। वह इस लैपटॉप को बांग्लादेश से ही लेकर आया था। इसके सहारे 19 दिसंबर को पश्चिम बंगाल पुलिस ने नोएडा के सेक्टर-14 स्थित ऑटो स्टैंड से अब्दुल अजीज को गिरफ्तार किया था।

पश्चिम बंगाल की जिला चौबीस नॉर्थ परगना की थाना पुलिस ने 17 दिसंबर को बांग्लादेश के फरीदपुर के रहने वाले बरकतउल्ला को गिरफ्तार किया था। इसके पास से पुलिस को एक लैपटॉप मिला था। सूत्रों के अनुसार लैपटॉप में 26-11 मुंबई, 9-11 न्यूयार्क, गुजरात दंगों और मुजफ्फरनगर दंगों के वीडियो समेत अन्य भड़काऊ भाषण और तकरीरें थी। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि यह लैपटॉप वह देवबंद, सहारनपुर में रहने वाले अब्दुल अजीज को देने आ रहा था।

इनका नेटवर्क पश्चिमी उत्तर प्रदेश में माहौल बिगाड़ना चाहता था। बरकतउल्ला अब्दुल से दिल्ली के निजामुद्दीन में मिला था। पश्चिम बंगाल पुलिस ने नोएडा पुलिस और एटीएस के साथ एक संगठित ऑपरेशन कर 19 दिसंबर को नोएडा के सेक्टर-14 स्थित ऑटो स्टैंड से गिरफ्तार कर लिया। अब्दुल बांग्लादेश के बेगम नवखली जिले का निवासी है।

12 घंटे तक रहा था थाने में
19 दिसंबर को थाना सेक्टर-20 में अब्दुल अजीज और पश्चिम बंगाल से लाए बरकतउल्ला से एटीएस, पश्चिम बंगाल पुलिस और नोएडा पुलिस ने पूछताछ की थी। हालांकि, अभी तक दोनों के किसी आतंकी घटना या किसी आतंकी संगठन से जुड़े होने का सबूत नहीं मिला है। अगले दिन बंगाल पुलिस जिला न्यायालय से अब्दुल अजीज की ट्रांजिट रिमांड लेकर पश्चिम बंगाल ले गई।
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