घोड़ी बछेड़ा गांव निवासी आकाश राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान से मंगलवार को डिस्चार्ज हुआ। अस्पताल से जाते वक्त उसने डॉक्टरों का आभार जताया और कहा कि डॉक्टरों और स्टाफ ने जो हौसला बढ़ाया उसी से जीत पाया हूं। जांच में पॉजिटिव आने के बाद मैं जिम्स में भर्ती हो गया। मेरी कोई ट्रेवल हिस्ट्री नहीं थी। सेक्टर-123 में स्थित मॉर्ट के किसी कार्य से दिल्ली गया हुआ था। आशंका है कि मैं दिल्ली में ही संक्रमित हुआ। वहां से आने के बाद ही मुझे बुखार आने लगा और मैं अस्पताल में भर्ती हो गया। बुखार आने से पांच-छह दिन पहले से स्टोर नहीं गया था। प्रशासन ने बड़ी सतर्कता से काम किया।
-आकाश, ग्रेटर नोएडा
कोरोना पीड़ित होने का पता चला और तबियत खराब हुई थी तो शुरू में डर लगा था। हालांकि, बाद में तबियत धीरे-धीरे ठीक होने लगी तो डर खत्म हो गया। अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ ने हौसला बढ़ाया। वहीं, वॉर्ड में माता-पिता का साथ मिलने से अधिक दिक्कत नहीं हुई। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान में दोबारा पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद भर्ती हुई अदिति बाजपेई ने अमर उजाला से यह बात कही। 23 मार्च को पिता के संक्रमित होने की रिपोर्ट आने के बाद 25 मार्च को मां और उसे कोरोना की पुष्टि हुई। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टॉफ ने हौसला बढ़ाया। आठ अप्रैल को कोरोना निगेटिव की रिपोर्ट आने के बाद दस अप्रैल को मुझे घर भेज दिया गया। -अदिति, ग्रेटर नोएडा
अमरावती से आए क्रॉकरी कारोबारी और शास्त्रीनगर सेक्टर 13 में रहने वाले उनके चार और रिश्तेदारों ने कोरोना को मात दे दी है। उनके साले, साले की पत्नी और दो बेटियों को बुधवार को कोविड-19 अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। कोरोना को मात देने वाले 33 साल के अतहर ने बताया कि कोरोना हो जाए तो डर तो लगता ही है, लेकिन अगर घबरा गए तो दिक्कत ज्यादा है। हौसला रखें, एहतियात बरतें तो जीतना मुश्किल भी नहीं है। उन्होंने ऐसा ही किया है। चिकित्सकों की मदद से उन्होंने इसे मात दे दी है। 32 की यास्मीन का कहना है कि खुदा का शुक्र है इस वबा से निजात मिली। सावधानी बरती, दवाइयां खाई और उम्मीद रखी। -अतहर और यास्मीन, मेरठ
वैसे तो मुझे कभी नहीं लगा कि मैं कोरोना से संक्रमित हो गया हूं लेकिन जब जांच के बाद कोरोना की पुष्टि हो गई तब मैं काफी घबरा गया था। एक सप्ताह तक सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में उपचार के बाद अब पूरी तरह स्वस्थ होकर घर आ गया हूं। संक्रामक बीमारियों का जो हौआ खड़ा किया जाता है, उससे घबराने की बजाय धैर्य से काम लेना चाहिए और मैंने यही किया। मैंने कभी खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया। मैं सप्ताह भर तक इलाज के दौरान खुद से यही कहता कि कोई भी संक्रमण हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता और इसी दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत आज हम स्वस्थ होकर अपने घर पर हैं। मैं कोरोना से संबंधित न तो समाचार देखता था और न ही इसके बारे में किसी से बातें करता था। अपने आप को इस तरह से रखा कि जैसे हमें कुछ हुआ ही न हो। मैंने हमेशा खुद को स्वस्थ महसूस किया, इसी वजह से हमारी रिपोर्ट भी निगेटिव आई। हालांकि, यह सब संक्रमण के बाद की बाते हैं, कोरोना जैसी संक्रामक बीमारी से हमेशा बचकर रहना चाहिए और किसी भी तरह के लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर से निर्देशों का हमेशा पालन करना चाहिए और मैने भी यही किया। -निजाम, पटौदी, गुरुग्राम