एक तरफ जहां गीता जयंती को लेकर तरह-तरह की राजनीति हो रही है और सरकार पर संघवादी विचारधारा का आरोप लग रहा है। वहीं मेवात की एक मुस्लिम छात्रा ने गीता के श्लोक मुंह जबानी याद कर उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो गीता को सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ बताते हैं। जबकि गीता कर्म करने की प्रेरणा देती है।
स्कूलों में जहां छठी कक्षा के बाद संस्कृत पढ़ाई जाती वहीं पांचवीं कक्षा की इस छात्रा ने अपनी मेहनत व लगन से संस्कृत में गीता के श्लोक याद कर एक मिसाल दी है। नूंह जिल के घागस गांव के सरकारी स्कूल की पांचवीं कक्षा में पढ़ रही तसलीमा की प्रतिभा को लोहा जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश शास्त्री ने भी माना।
तसलीमा ने गीता जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगिता में श्लोक उच्चारण कर सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। हालांकि प्रतियोगिता में छठी कक्षा से ऊपर के बच्चों को शामिल किया गया था। जिसके चलते तसलीमा को वरीयता प्राप्त नहीं हो पाई।
हालांकि उसका नाम जिला स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में श्लोक उच्चारण करने के लिए चिह्नित किया गया है। वहीं तसलीमा का कहना है कि गीता हमें कर्म करने की प्रेरणा देती है और कर्म को हर धर्म में सर्वोपरि माना गया है। उसने कहा कि वह लगातार गीता के श्लोक याद कर रही है और उनका अर्थ भी, साथ ही उच्चारण को लेकर विशेष मेहनत की जा रही है।