एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, जिसके पास अपनी फील्ड का दस साल का अनुभव था, उसने अपनी जॉब छोड़कर उन बच्चों का हाथ थाम लिया, जिनको अपने जीवन की समझ ही नहीं थी। उनके जीवन को दिशा देने का फैसला किया। यहां बात हो रही है इंदिरापुरम निवासी अपर्णा गुप्ता की। वे पिछले एक वर्ष से स्पेशल बच्चों के लिए ब्रजविहार में अपना स्कूल चला रही हैं।
न्यू होप एकेडमी नाम से स्कूल चला रहीं अपर्णा ने बताया कि उनकी बेटी भी स्पेशल चाइल्ड है। अब वह सात वर्ष की हो चुकी है। उसके ट्रीटमेंट और थेरेपी के लिए हम देश के बड़े से बड़े अस्पताल में गए और महंगे से महंगी थेरेपी कराई।
अपर्णा बताती हैं कि अक्सर अभिभावक अपने बच्चों की जरूरत को समझ नहीं पाते। सही समय पर यदि ऐसे बच्चों को इलाज मिल जाए तो उन्हें काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। कई बार जानकारी न होने और महंगे इलाज के लिए पैसा न होने की वजह से अभिभावक अपने बच्चे को उसी हालात में छोड़ देते हैं। कोर्स करने के बाद मैंने 2018 की जुलाई में अपना यह स्कूल खोला, जहां बच्चों को स्पेशल थेरेपी देकर उन्हें ठीक किया जाता है।
अपर्णा ने बताया कि उनकी बेटी जिन-जिन थेरेपी से गुजरी और उसे ठीक करने के जितने प्रयास हमने किए, वह सभी सुविधाएं मैं अपने स्कूल में स्पेशल बच्चों को देती हूं। बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए वर्ष 2018-2019 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मोस्ट इनोवेटिव थेरेपीज अवार्ड दिया गया है।
बच्चों को दी जाती हैं यह सुविधाएं
- इमोशनल और विहेवियर थेरेपी
- योगा थेरेपी
- ब्रेन जिम थेरेपी
- म्यूजिक थेरेपी
- ओरा फेशियल थेरेपी
- आर्ट थेरेपी
- ऑक्यूपेशनल थेरेपी
- ऑडियो विजुअल थेरेपी