ग्रेटर नोएडा की 73 वर्षीय आरके ऊषा उस जीवटता की मिशाल हैं, जो खुद की चिंता छोड़ गरीब बच्चों का जीवन संवारने में जुट गईं। बेबस बचपन को सुधारने की जिद में अकेली घर से निकलने वाली ऊषा आज काफिला तैयार कर चुकी हैं। उनके विकास विश्रांति ट्रस्ट से जुड़े 25 वरिष्ठजन 450 बच्चों को पठन-पाठन करा रहे हैं।
गामा-1 निवासी आरके ऊषा संस्था की संस्थापक हैं। उन्होंने बताया कि मार्च 2011 में ट्रस्ट की शुरुआत की थी। इसका मकसद उन बच्चों की मदद करना है, जिनके पिता भट्टे या किसी ऐसे संस्थान पर काम करते हैं, जहां आमदनी का जरिया बेहद कम है।
ग्रेनो के विभिन्न कोनों से ऐसे बच्चों की तलाश कर उन्हें शिक्षा दी जा रही है। डेल्टा थ्री में बिल्डिंग किराये पर लेकर कुछ महिलाओं एवं लड़कियों को कंप्यूटर, सिलाई आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
आर्थिक मदद के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली। आम लोगों से ही आर्थिक सहायता प्राप्त होती है। शेष निजी स्तर से कदम उठाए जाते हैं।