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Delhi: बारापुला फेज-3 फ्लाईओवर दिसंबर तक होगा तैयार, वाहनों की बढ़ेगी रफ्तार; ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

Tue, 13 May 2025 04:35 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

यह फ्लाईओवर सराय काले खां के पास मौजूदा बरापुला कॉरिडोर से जुड़ेगा, जिससे पूर्व-दक्षिण दिल्ली के बीच सफर तेज और सुगम होगा। मंत्री ने सोमवार को नारियल तोड़कर दोबारा से इस परियोजना का शिलान्यास किया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
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विस्तार
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दिल्ली सरकार ने बारापुला फेज-3 फ्लाईओवर परियोजना को इस साल दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। यह फ्लाईओवर पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 को दक्षिणी दिल्ली के एम्स से जोड़ेगा, जिससे लाखों लोगों को यातायात जाम से राहत मिलेगी। सोमवार को पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने निर्माण स्थल का दौरा कर तेजी से चल रहे काम का निरीक्षण किया।

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यह फ्लाईओवर सराय काले खां के पास मौजूदा बरापुला कॉरिडोर से जुड़ेगा, जिससे पूर्व-दक्षिण दिल्ली के बीच सफर तेज और सुगम होगा। मंत्री ने सोमवार को नारियल तोड़कर दोबारा से इस परियोजना का शिलान्यास किया। मंत्री ने कहा कि परियोजना में देरी का मुख्य कारण पिछली सरकार की उदासीनता रही है। पूर्ववर्ती सरकार ने समय पर ठेकेदारों को भुगतान नहीं किया और न ही पेड़ों की कटाई और स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की। नतीजतन, यह महत्वपूर्ण परियोजना वर्षों तक अटकी रही और इसकी लागत भी कई गुना बढ़ गई।

पेड़ों के स्थानांतरण पर बनी सहमति : पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि यह दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना है, जो पिछले कई सालों से अनदेखी और लापरवाही का शिकार है। हमने कार्यभार संभालते ही इसे प्राथमिकता दी और कई स्तरों पर प्रगति सुनिश्चित की गई है। अब पेड़ों के स्थानांतरण के लिए वन विभाग से सहमति मिल गई है। जल्द ही जरूरी स्वीकृतियां मिल जाएंगी, जिसके बाद परियोजना के अंतिम चरण का कार्य जल्द शुरू होगा।
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परियोजना का करीब 89% काम पूरा
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक इस परियोजना का करीब 89% काम पूरा हो गया है। शेष काम पेड़ों के स्थानांतरण के लिए वन विभाग की स्वीकृति के अभाव में रुका हुआ है। करीब 250 पेड़ों को हटाने और स्थानांतरित करने की जरूरत है, जिसके लिए स्वीकृति प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

2017 में पूरा  किया जाना था
यह परियोजना 2014 में स्वीकृत हुई थी और 2015 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था। इसे 2017 में पूरा किया जाना था, लेकिन पिछली सरकार में विभागीय समन्वय की कमी और प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण काम लंबा खिंचता गया। परियोजना के लिए समय-समय पर स्वीकृतियों में देरी और अन्य तकनीकी अड़चनें रुकावट का कारण बनीं। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने बताया कि अब नियमित निरीक्षण हो रहा है और तकनीकी अड़चनें दूर कर दी गई हैं। सभी विभागों के साथ समन्वय बेहतर हुआ है, जिससे काम की गति बढ़ी है।

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