लॉकडाउन खुलने के बाद अदालतों में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) ने हाईकोर्ट को सुझाव दिए हैं। इसके तहत सामाजिक दूरी का अनुपालन करते हुए अदालतों में चरणबद्ध तरीके से नियमित और सामान्य कार्य शुरू करने संबंधी अन्य सुझावों पर जोर दिया गया है।
हाईकोर्ट ने अदालतों को हॉटस्पॉट बनने से रोकने के लिए सुझाव मांगे थे। हाईकोर्ट ने लॉकडाउन के बाद अदालतों में लोगों की भीड़ को नियंत्रण में रखने के लिए एक समिति का गठन किया था। इस समिति का गठन उच्च न्यायालय की वरिष्ठ न्यायमूर्ति हिमा कोहली की अध्यक्षता में किया गया।
समिति ने दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन समेत अन्य सभी जिला अदालतों से भी इस संबंध में सुझाव मांगे थे। एसोसिएशन ने समिति को भेजे अपने सुझावों में कहा कि अदालत में कार्यवाही न केवल आवश्यक राहत देने तक सीमित होनी चाहिए, बल्कि आम याचिकाकर्ताओं को कानूनी उपचार भी मिलना चाहिए।
एसोसिएशन ने कहा कि जिन मामलों को सूचीबद्ध किया जाता है उनमें निषेधाज्ञा राहत, जमानत अर्जी, फैसले का स्थगन, मध्यस्थ फैसले पर आपत्ति, याचिकाओं का निपटारा, सभी प्रकार की रिट याचिका और फौजदारी अर्जी को भी शामिल किया जाना चाहिए।
सामाजिक दूरी के मानदंडों का पालन जरूरी
इसके साथ ही यह भी कहा गया कि लोकतांत्रिक समाज में सभी को न्याय का अधिकार होता है, लेकिन सामाजिक दूरी के मानदंडों को सावधानीपूर्वक ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। अदालतों के चरणबद्ध तरीके से खुलने पर सावधानी नियमों के स्पष्ट अनुपालन के तहत मास्क पहनना और स्वच्छता के उच्च मानकों का अनुपालन करना भी जरूरी होना चाहिए।
इंटर्न और याचिकाकर्ताओं के प्रवेश पर रहे प्रतिबंध
एसोसिएशन ने कहा कि हालात सामान्य होने तक याचिकाकर्ताओं और इंटर्न को अदालत और चेंबर में आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। इसके साथ ही पक्ष रखने वाले वकीलों के ही अदालतों में आने का नियम जारी रहना चाहिए। सुझाव दिया कि अदालत परिसर में प्रवेश के लिए एक रास्ता होना चाहिए और आने वाले की जांच व संक्रमण मुक्त करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
मध्यस्थता केंद्रों पर भी लागू होना चाहिए नियम
जिला कानूनी सेवा अधिकरण और मध्यस्थता केंद्रों में वादियों की व्यक्तिगत उपस्थिति की जरूरत होती है, इसलिए हालात सामान्य होने तक वहां पर पूर्ण कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती, इसलिए मध्यस्थता प्रक्रिया वादियों के बिना भी की जा सकती है।