दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
अरविंद केजरीवाल की विधानसभा सदस्यता रद्द होने के साथ चुनाव लड़ने पर भी रोक लग सकती है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन कार्यालय ने केजरीवाल के चुनावी खर्च के मुद्दे पर केंद्रीय चुनाव आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
आयोग सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट में कहा गया है कि केजरीवाल ने विधानसभा चुनाव में तय सीमा से करीब सात लाख रुपये ज्यादा खर्च किए।
केजरीवाल ने खर्च किए 21 लाख
मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय देव ने बताया कि चुनाव आयोग को रिपोर्ट सौंप दी गई है अब आयोग फैसला करेगा कि यह मामला अयोग्य ठहराए जाने का बनता है या नहीं।
सूत्रों के मुताबिक, प्रचार के दौरान केजरीवाल ने 21 लाख रुपये खर्च किए थे, जबकि विधानसभा चुनाव में एक उम्मीदवार अधिकतम 14 लाख तक खर्च कर सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री के चुनावी खर्च की बात जिला व्यय निगरानी समिति की जानकारी में बीते दो दिसंबर को आई थी। इसमें पाया गया कि जंतर-मंतर पर आयोजित कंसर्ट का कुल खर्च 39,16,459 रुपये था।
छह साल तक नहीं लड़ पाएंगे चुनाव!
कंसर्ट में खर्च हुए पैसे को आप के तीन उम्मीदवारों केजरीवाल, सोमनाथ भारती एवं सुरिंदर सिंह के बीच बांट दिया गया। इस आधार पर तैयार रिपोर्ट में केजरीवाल का चुनावी खर्च निर्धारित सीमा को पार कर गया।
जानकारों का मानना है कि चुनाव में तय सीमा से अधिक खर्च के मामले में दोषी विधायकों या सांसदों की सदस्यता रद्द हो सकती है और छह साल के लिए चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है।
उधर, पार्टी ने रिपोर्ट के बारे में किसी तरह की जानकारी होने से इनकार किया है। हालांकि एक पदाधिकारी ने दलील दी कि कंसर्ट पर होने वाले खर्च को पार्टी के खाते में जोड़ा जाना चाहिए। इसकी जिम्मेदारी उम्मीदवारों पर नहीं होती।