ग्रेटर नोएडा में विजय पंडित हत्याकांड में गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा ने आवाज उठाई थी। बढ़ते अपराधों का विरोध करने पर अब सांसद अपराधियों के निशाने पर आ गए थे।
घटना के एक दिन बाद ही सांसद दादरी के लिए चले ही थे कि किसी ने उन्हें सूचना दी, वहां जाने से जान को खतरा हो सकता है। इस पर सांसद को वापस लौटना पड़ा है।
तभी से उनकी निजी सुरक्षा को और मजबूत किया गया।
बहुत पुराना है ये खेल
पुलिस सूत्र बताते हैं कि दादरी व्यापारिक कस्बे में रंगदारी का खेल आज का नहीं बल्कि दशकों पुराना है। असामाजिक तत्व व्यापारियों का शुरू से ही शोषण करते रहे हैं।
यही कारण है कि ज्यादातर व्यापारी दादरी को छोड़ चुके हैं। यहां कई व्यापारियों की हत्याएं हो चुकी हैं। पुलिस ने अभियान चलाकर कई अपराधियों को गिरफ्तार भी किया है, लेकिन जितनी गिरफ्तारी होती हैं, उससे ज्यादा नए अपराधी बन जाते हैं।
सूत्र बताते हैं कि डॉ. महेश शर्मा के साथ सिर्फ अपराधियों का विरोध करना ही मुद्दा नहीं रहा बल्कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी कहीं न कहीं लोगों को खटकती रही है।
केंद्र ने राज्य को सौंपा जिम्मा
सांसद की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र तक रिपोर्ट पहुंची और केंद्र ने प्रदेश सरकार को जिम्मा सौंपा है। स्थानीय स्तर पर भी प्रशासन सक्रिय हो गया है। साथ ही स्थानीय खुफिया विभाग भी जांच में जुटा हुआ है।
मालूम हो कि पिछले सप्ताह सांसद डॉ. महेश शर्मा और भाजपा के वरिष्ठ नेता हरिश्चंद्र भाटी ने प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमन से मिलकर कहा था कि क्षेत्र के युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार, खेलकूद की सुविधाएं आदि की व्यवस्था होनी जरूरी है, अन्यथा युवा वर्ग कलम की जगह बंदूक पकड़ने की राह पर चल देगा।