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राजनीतिक गुरु बने केजरीवाल: शपथ लेने के बाद आतिशी ने पैर छूकर लिया आशीर्वाद, दिल्ली LG को किया इग्नोर

Sat, 21 Sep 2024 07:06 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

आतिशी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अरविंद केजरीवाल के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। आतिशी ने आठवीं मुख्यमंत्री के तौर पर दिल्ली में शपथ ली है। 
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आतिशी ने केजरीवाल के पैर छूए - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी दिल्ली में अब तीसरी महिला मुख्यमंत्री ने कमान संभाल ली है। राज निवास में आतिशी ने शनिवार शाम को 4.30 बजे सबसे पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने उन्हें सीएम पद की शपथ दिलाई है। आतिशी शपथ ग्रहण समारोह में नीली साड़ी पहनकर पहुंचीं। वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संजोयक अरविंद केजरीवाल भी समारोह में पहुंचे। उन्होंने नीली शर्ट पहन रखी थी। अक्सर केजरीवाल नीली शर्ट में नजर आते हैं। केजरीवाल के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

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अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद आम आदमी पार्टी ने नेतृत्व परिवर्तन किया। केजरीवाल सरकार में शिक्षा मंत्री रहीं आतिशी ने दिल्ली की कमान संभाल ली। दिल्ली स्थित राज निवास में आतिशी के साथ पांच अन्य मंत्रियों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। नई सरकार में गोपाल राय, कैलाश गहलोत, सौरभ भारद्वाज, इमरान हुसैन और मुकेश अहलावत मंत्री बने हैं। 

दिल्ली में आतिशी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली इसके साथ ही उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले प्रमुख चहरों को भी इसका हिस्सा बनाया गया। उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री समेत कुल छह मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। 

शपथ ग्रहण के बाद नई मुख्यमंत्री आतिशी ने पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। जब वह उनका आशीर्वाद ले रही हैं तो दिल्ली की सत्ता के तीन प्रमुख केंद्र एक ही फ्रेम में कैद हो गए। उनकी यह तस्वीर लोगों में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे लेकर अपने हिसाब से भावनाओं को व्यक्त कर रहे हैं।
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कितना पढ़ी लिखी हैं आतिशी
मुख्यमंत्री आतिशी कैबिनेट में सबसे पढ़े लिखे चेहरों में हैं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से 2006 में एमएससी की है। आतिशी ने चुनावी हलफनामे में खुद को समाजसेवक बताया है। इसके अलावा दो अन्य मंत्री गोपाल राय और कैलाश गहलोत की शैक्षिक योग्यता भी परास्नातक है। गोपाल राय ने खुद का पेशा समाजसेवा तो कैलाश गहलोत ने राजनीति बताया है।


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