संसद के मानसून सत्र में इस बार विपक्ष मनोहर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए मोदी पर भी निशाना साध सकता है। मोदी सरकार को घेरने के लिए अटाली दंगे को विपक्षी दल हथियार बनाएंगे।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम)के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पहले ही कह चुके हैं कि यह मामला संसद में उठेगा। उनके एक सहायक ने कहा है कि इससे जुड़ा सवाल भेजा जा रहा है।
माना जा रहा है कि अटाली में हुए दंगे की गूंज दोनों सदनों में सुनाई देगी। वहीं, वामदल राज्यसभा में हमलावर रुख अपनाएंगे। हालांकि मोदी सरकार को किरकिरी से बचाने के लिए प्रदेश सरकार दंगे के डेढ़ माह बाद आरोपियों की गिरफ्तारी करवा रही है।
कई नेताओं ने किया गांव का दौरा
जबकि केंद्र ने अर्धसैनिक बलों को तैनात कर आग बुझाने की कोशिश शुरू कर दी है। मालूम हो कि धार्मिक स्थल निर्माण को लेकर 25 मई को गांव के संप्रदाय विशेष और बहुसंख्यकों के बीच संघर्ष हुआ था।
इसमें अल्पसंख्यकों के 19 घरों में आग लगा कर तोड़फोड़ की गई थी। संप्रदाय विशेष के लोगों को प्रशासन ने अस्थायी शिविर में थाना शहर में तीन जून तक रखा था।
इस दौरान ओवैसी के अलावा सीपीएम नेता तपन सेन, सीपीआई के डी. राजा, जेडीयू सांसद अली अनवर अंसारी और कांग्रेस सांसद शादीलाल बत्रा सहित कई नेता राहत शिविर में आए थे।
पथराव के बाद दोबारा भड़की थी हिंसा
उन्होंने पीड़ित परिवारों को मुद्दे को संसद में उठाने का आश्वासन दिया था। एक जुलाई को कीर्तन कर रहीं महिलाओं पर पथराव के बाद दोबारा मामला भड़क गया।
अल्पसंख्यक समुदाय के एक युवक की ओर से पत्थरबाजी करने से मामला तूल पकड़ गया। सीपीएम नेता तपन सेन राज्यसभा में नियम 377 के तहत इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करेंगे।
वहीं, कांग्रेस राज्यसभा सदस्य शादीलाल बत्रा सबसे पहले इसे पार्टी फोरम पर रखेंगे। जहां पर पार्टी तय करेगी कि यह मुद्दा किस रूप में उठाया जाए। विपक्ष राज्य सरकार के बहाने इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने की जोरदार तैयारी कर रहा है।