दिल में चाह हो तो किसी भी काम को करने में उम्र कभी बाधा नहीं बनती। शहर के सेक्टर 15-में रहने वाले ऐसे ही एक शख्स हैं 80 साल के मथारू, जो लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। वे बागवानी कर अपनी उम्र के और लोगों को भी सक्रिय रहने का संदेश दे रहे हैं।
पंजाब के लुधियाना जिले के बंगल गांव निवासी बलवंत सिंह मथारू मैट्रिक तक पढ़ाई करने के बाद वर्ष 1958 में फरीदाबाद आ गए। उन्होंने यहां ऑटो पार्ट्स बनाने की छोटी फैक्ट्री लगाई। बागवानी का शौक उन्हें बचपन से था।
बच्चों के बड़े होने पर उन्होंने कारोबार उन्हें सौंपकर घर में ही 500 गज की जगह में बागवानी शुरू कर दी। यह काम पिछले 7-8 वर्षों से चल रहा है। मथारू ने सौ से अधिक ट्रे में बैगन, पालक, मूली, मिर्च, टमाटर, लहसुन, प्याज, गोभी, चीकू आदि की सब्जियां उगा रखी हैं।
घर में उगाया 33 फिट लंबा गन्ना
यही नहीं, वे यूरिया के बदले 22 प्रकार की जैविक खाद बनाने में जुटे हैं। इस खाद को बनाने के लिए पीपल, गोभी, जामुन, मूली, कटहल, नीम आदि के पत्तों के साथ भैंस, गाय व बकरी के गोबर, भुस, नारियल व दही को मिलाकर धूप में रख दिया जाता है।
दो-तीन महीने में धूप में रखे ड्रम में जैविक खाद बनकर तैयार हो जाती है। इसी जैविक खाद के बल पर वे सब्जियां उगा रहे हैं। मथारू ने घर में ही 33 फुट लंबा गन्ना उगा रखा है।
यह कारनामा उन्होंने जैविक खाद के बल पर किया है। गन्ना गिरने न पाए, इसके सपोर्ट के लिए सीढ़ियां लगा रखी हैं। उनका लक्ष्य 41 फुट तक लंबा गन्ना उगाना है। अब तक का रिकॉर्ड 40 फुट गन्ने का है, जो गुजरात में पटेल परिवार ने उगाया है।
मशीन बनाकर आए थे चर्चा में
वर्ष 2007 में बलवंत सिंह मथारू सलाद और सब्जी काटने की मशीन बनाकर पहली बार चर्चा में आए और वर्ष 2009 में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने में सफल रहे। मशीन से करीब 15 प्रकार की सलाद की कटिंग की जाती है। इसके अलावा, उनकी बनाई मशीन से चार किलो सब्जी व फल केवल पांच मिनट में काटे जा सकते हैं।
मथारू ने यूरिया के बदले जैविक खाद पर जोर देने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह को पत्र भी लिखा है। इसमें उन्होंने यूरिया से होने वाले नुकसान को देखते हुए जैविक खादों को बढ़ावा देने की अपील की है। उन्होंने जरूरत पड़ने पर किसानों को जैविक खाद बनाने में सहयोग करने की भी बात कही है।