अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के बीच एसोचैम (एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कॉमर्स ऑफ इंडिया) ने रिपोर्ट जारी कर बताया कि योग के जरिये उद्योगों के कर्मचारियों की कार्यकुशलता में इजाफा हो रहा है।
53 फीसदी मल्टीनेशनल कंपनियों में वर्क पावर बढ़ाने के लिए योग सत्र चलाया जा रहा है। 35 फीसदी की दर से कंपनियों में योग सत्र की मांग बढ़ रही है।एसोचैम का दावा है कि मल्टीनेशनल कंपनियों में योग सत्र होने से कर्मचारियों में काम को लेकर तनाव कम करने, याद्दाश्त बढ़ाने और कार्य संतुष्टि को बढ़ाने के लिए यह आयोजन किया जा रहा है।
एसोचैम के हेल्थ कमेटी काउंसिल के चेयरमैन डॉ. बीके राव का कहना है कि कई बी-स्कूल द्वारा योग को अनिवार्य कर तनाव को कम करने के लिए कॉरपोरेट को टिप्स दे रही है, जिसका नतीजा है कि बीते वर्ष 20 फीसदी के मुकाबले इस वर्ष 35 फीसदी कॉरपोरेट में योग होने लगा है।
250 मल्टीनेशनल कंपनियों के 1500 कॉरपोरेट कर्मचारियों पर एसोचैम ने सर्वे किया, जिसमें पाया गया कि करीब 45.5 फीसदी लोग डिप्रेशन और 23 फीसदी लोग मोटापे से ग्रस्त हैं।
9 फीसदी लोग हाई ब्लड प्रेशर और 8 फीसदी लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। इसके अलावा 5.5 फीसदी स्पॉन्डलाइटिस, 4 फीसदी हृदय रोग, 3 फीसदी सर्वाइकल, 2.5 फीसदी अस्थमा, 1 फीसदी स्लिप डिस्क, 1.5 फीसदी अर्थराइटिस से ग्रस्त हैं। मल्टीनेशनल कंपनियों के करीब 40.5 फीसदी छह घंटे से कम समय सोने की वजह से अधिक तनाव महसूस करते हैं।
एसोचैम ने सर्वे के हवाले से बताया कि बीमारियों से ग्रस्त होने की वजह से कर्मचारियों में छुट्टी की प्रवृत्ति अधिक थी, जिसके वजह से मल्टीनेशनल कंपनियां चिंतित होकर योग की तरफ बढ़ रही है और इसी का नतीजा है। दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य औद्योगिक शहरों में बीते एक वर्ष में इसकी मांग बढ़ी है।