राजधानी में विधानसभा भंग है और चुनावी घोषणा अभी तक नहीं हुई है। भंग विस में दिल्ली के प्रोजेक्टों के रंग उड़ गए हैं। कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं जिसमें उपराज्यपाल या वित्त विभाग ने साफ तौर पर लिख दिया है कि जब अगली सरकार आएगी तभी कोई निर्णय लिया जाए। ऐसे में सरकार के अधिकारी हों या जनता सबको नई सरकार का इंतजार है।
पूर्वी दिल्ली को कब मिलेगी मोनोरेल
दिल्ली मेट्रोरेल फेज-चार में पूर्वी दिल्ली के उस रूट को शामिल नहीं किया गया है, जहां मोनोरेल का प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जिस रूट पर मोनोरेल प्रस्तावित है, वहां मेट्रो नहीं जाएगी। जबकि शास्त्री पार्क से त्रिलोकपुरी के बीच प्रस्तावित मोनोरेल को लेकर दिल्ली सरकार ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल में 2008 में पहली स्टडी की गई। बतौर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने 2013 में सैद्धांतिक स्वीकृति दी। डीपीआर के अनुसार पहला कॉरिडोर 11 किमी का शास्त्री पार्क से त्रिलोकपुरी का बनेगा जिसमें 12 स्टेशन होंगे। निर्माण पर 2289 करोड़ रुपये का खर्च आना है जिसमें संजय झील में डिपो निर्माण शामिल है।
नए मॉडल पर कब शुरू होंगे वन स्टॉप जीवन सेंटर
दिल्ली सरकार ने वन स्टॉप जीवन सेंटर शुरू किए थे जिसमें बिजली-पानी बिल से लेकर सिनेमाघर की टिकट और तमाम सेवाएं दी जाती थीं। मॉडल फेल हो गया तो नए मॉडल पर फिर से सेंटर खोलने की प्रक्रिया शुरू की गई। लेकिन राजधानी में राष्ट्रपति शासन लागू है जबकि प्रोजेक्ट को कैबिनेट की मंजूरी चाहिए। ऐसे में अधिकारी जानबूझकर प्रोजेक्ट में आगे नहीं बढ़ा रहे हैं।
इन प्रोजेक्ट को भी है शुरु होने का इंतजार
डीटीसी में नई बसों की खरीद कब होगी
दिल्ली में वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रदूषण से जुड़ी तमाम समितियों ने सार्वजनिक बस सेवा बढ़ाने की सिफारिश की है। लेकिन दिल्ली में बसों की संख्या लगातार कम हो रही है। डीटीसी की खटारा बसें रिटायर हो रही हैं और नई बसें नहीं जुड़ रही हैं। टेंडर में आपूर्ति करने वाली कंपनी ने कीमत अधिक मांगी तो अब जो टेंडर प्रक्रिया में है, उसमें भी एक ही कंपनी आगे आई है। ऐसे में नई बस किस कीमत पर आए और एक कंपनी टेंडर में आई है तो ठेका कैसे दिया जाए, यह फैसला भी नई सरकार के गठन के बिना संभव नहीं होता दिख रहा है।
बीआरटी कॉरिडोर कौन बनाएगा या कौन चलाएगा
पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की सरकार में बीआरटी कॉरिडोर को लेकर खूब बवाल हुआ। सरकार ने पैर पीछे खींचे। एक कॉरिडोर अंबेडकर नगर से दिल्ली गेट के बीच बन चुका था, उसका रखरखाव दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम के पास है। इसमें परिवहन विभाग रखरखाव की राशि नहीं दे पा रही है। इसमें रखरखाव पीडब्ल्यूडी को दिए जाने का प्रस्ताव था लेकिन उपराज्यपाल ने आगामी सरकार आने तक फैसला सुरक्षित रख दिया है।
शिकायतों के निपटारे का केंद्रीयकृत सिस्टम भी ढीला
दिल्ली सरकार ने जनता-जनार्दन की शिकायतों का निपटारा करने के लिए केंद्रीयकृत सिस्टम तैयार किया था। लेकिन अब सरकार में मुख्यमंत्री या मंत्री नहीं हैं। ऐसे में जनता की शिकायतें कम हो गई हैं। जो लोग शिकायत करते भी हैं, उसका समाधान उतनी गतिड से नहीं हो पा रहा है। इन दिक्कतों को देखते हुए सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने विधायक स्तर पर एक सिस्टम तैयार किया था जिसमें कॉल सेंटर भी बनाया था। अब सरकार नहीं है तो वह सिस्टम भी काम नहीं कर रहा है।