हालांकि आशुतोष ने पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को कुछ महीने पहले ही अपना इस्तीफा सौंप दिया था, लेकिन इसे अभी तक मंजूर नहीं किया गया है। इसलिए अब वह सार्वजनिक तौर पर पार्टी छोड़ने की घोषणा करेंगे।
उन्होंने अपने इस्तीफे में पार्टी छोड़ने की वजह नितांत निजी बताई है। आशुतोष के करीबी आप के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ बनी पार्टी में जिस मकसद से वह आए थे, उससे उन्हें पार्टी में भटकाव महसूस हो रहा है।
लिहाजा वह आप ही नहीं, राजनीति से भी संन्यास ले रहे हैं। आशुतोष के पत्रकारिता में दोबारा सक्रिय होने की संभावना है। आम चुनाव से महज आठ महीने पहले आशुतोष जैसे कद्दावर नेता का पार्टी से जाना आप के लिए बड़ा झटका है।
ये भी छोड़ गए
किरण बेदी, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, मयंक गांधी, शाजिया इल्मी और कुमार विश्वास के साथ आशुतोष भी आप के संस्थापक सदस्यों में से थे। कुमार के अलावा इन सभी ने एक-एक कर आप छोड़ दी है। कुमार विश्वास फिलहाल पार्टी में हैं, लेकिन पूरी तरह निष्क्रिय हैं। अपने लेखों और कविताओं में जरूर वह आप के नेतृत्व पर तंज कसते रहते हैं।