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मुख्य सचिव अंशु प्रकाश से मारपीट मामला: बिभव के मुकरने से पुलिस को पहला झटका

Wed, 15 Aug 2018 12:51 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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फाइल फोटो
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मुख्य सचिव अंशु प्रकाश से मारपीट मामले में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री सहित 11 अन्य विधायकों के खिलाफ मुकदमा शुरू होने से पहले ही धराशायी होने के आसार बन गए हैं। 
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मामले में मुख्य गवाह एवं मुख्यमंत्री के निजी सचिव बिभव कुमार ने पुलिस की कहानी पर सवाल खड़े कर और केजरीवाल के समर्थन में बयान जारी कर इसकी शुरुआत कर दी है। 

 घटना के बाद पुलिस ने मुख्यमंत्री के सलाहकार रहे वीके जैन को मुख्य गवाह मानते हुए अदालत में गवाही करवाई थी। तभी से यह लगने लगा था कि मामले को जिस प्रकार तेजी से उछाला जा रहा है, क्या वह उसी प्रकार अदालत में टिक पाएगा। 
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इस मामले में एक मात्र मुख्य गवाह स्वयं पीड़ित है। इसके अलावा पुलिस ने बिभव व वीके जैन के अलावा विवेक यादव है, जो मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव हैं। 
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राजनीतिक उठापटक में पुलिस के पहले गवाह बिभव ने दायर आरोपपत्र पर संज्ञान से पहले ही अभियोजन पक्ष को झटका दे दिया है। स्पष्ट है कि अब वे अदालत के समक्ष गवाही के दौरान अभियोजन पक्ष की स्टोरी का समर्थन करने वाले नहीं है। ऐसी ही उम्मीद दो अन्य गवाहों से भी की जा रही है। 

मंत्रियों-विधायकों पर दर्ज 21 केस में 19 खारिज, सभी में पुलिस को फटकार
पहले से ही क्यास लगाए जा रहे थे कि मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी या काम देख रहे अन्य पुलिस की कार्रवाई से डर कर गवाही दे सकते हैं, लेकिन वे अदालत में जाकर मुकर भी सकते हैं। 

आमतौर पर ऐसे में मामलों में ऐसा ही होता आया है। मंत्रियों व विधायकों के खिलाफ 21 मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन इनमें से 19 मामले खारिज हो चुके हैं। हर मामले में पुलिस को फटकार ही मिली है।

इस मामलों के खारिज होने के पीछे भी गवाहों द्वारा अभियोजन पक्ष की स्टोरी का समर्थन न करना रहा है।  इस मामले में पुलिस के पास अंशु प्रकाश के बाद उक्त तीनों ही मुख्य गवाह थे, जो घटना स्थल पर थे। यदि तीनों गवाहों का यही रवैया रहा तो पुलिस के लिए घटना को साबित करने में मुश्किल होगी। 
 
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